उरई। बड़ा कमाल दिखाने की घात में छोटे दलों ने महारथियों की नींद उड़ाकर रखी है। ये दल खासतौर से भाजपा के बैकबर्ड कास्ट के लिए घातक साबित हो रहे हैं। जिसकी वजह से स्थिति संभालने के लिए आरएसएस की कुमुक भाजपा द्वारा मांगी जा रही है।
महान दल ने पिछले विधानसभा चुनाव में भी चैंकाने वाला प्रदर्शन किया था। कुशवाहा, मौर्य और शाक्य उपजातियों के बेस पर बनी यह पार्टी इस कदर चर्चा में रही थी कि कांग्रेस के साथ उसके गठबंधन की बात चल पड़ी थी। जालौन जिले में कुशवाहा बिरादरी की अच्छी खासी संख्या है। इसलिए इस जिले में यह पार्टी अपनी शानदार धमक दिखाने में कामयाब रही थी।
2012 के विधानसभा चुनाव में महान दल की वजह से सबसे ज्यादा मुसीबत माधौगढ़ विधानसभा क्षेत्र में बहुजन समाज पार्टी को हुई थी। बीएसपी ने कुशवाहा बिरादरी के ही संतराम कुशवाहा को उम्मीदवार बनाया था लेकिन महान दल में कुशवाहा समाज की बढ़ती लामबंदी की वजह से चुनाव नतीजे खुलने के अंतिम दौर तक उन्हें धुकपुकी का सामना करना पड़ा था। हालांकि अंततोगत्वा संतराम कुशवाहा विजयी हुए थे। लेकिन महान दल के अतीक अहमद ने 20303 मत जुटाकर उनके हिस्से में बड़ी सेंध लगाने का सबूत दिया था।
2012 की विधानसभा चुनाव के बाद महान दल ठंडा पड़ गया था। लेकिन इसके दूरंदेशी नेतृत्व ने पंचायत चुनाव में पूरी सक्रियता दिखाई तांकि नये विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी को गियरअप करने का पर्याप्त समय मिल सके। जिला पंचायत में महान दल के तीन सदस्य हैं जिनकी बदौलत बरसाती की कलंकपूर्ण पहचान खत्म कर महान दल ने स्थाई सांगठनिक तानाबाना तैयार किया है।
महान दल ने इस बार अपनी नीति में बदलाव किया है पहले इसमें केवल ओबीसी, दलित और मुसलमानों की इंट्री थी। लेकिन इस बार यह दल क्षत्रिय समाज को विधायक चुनवाने का भरोसा दिलाकर अपनी ओर आकर्षित करने में कामयाब हुआ है।
मंडल के इस नये अवतार को माधौगढ़ विधानसभा क्षेत्र में खासा रेस्पोंस मिल रहा है। भाजपा ने ठाकुरों की परंपरागत सीट माने जाने वाले इस निर्वाचन क्षेत्र में कुर्मी समाज की पार्टी के लिए समर्पित कार्यकर्ता मूलचंद निरंजन को उम्मीदवार बनाया है। लेकिन क्षत्रिय समाज इसे हजम करने के लिए तैयार नही है। जिसके कारण क्षेत्र के सबसे लोकप्रिय मास लीडर माने जाने वाले रविंद्र सिंह मुन्ना ने महान दल की सवारी कर ली तो क्षत्रिय समाज के ज्यादातर लोग डूबते को तिनके का सहारा मान रूढ़िवादिता से परे होकर महान दल के साथ जुट रहे हैं। भाजपा खेमा इस धुव्रीकरण के चलते सांसत में है।
उधर कालपी विधानसभा क्षेत्र में निषाद समाज कई महीने से अपने अस्तित्व का एहसास कराने के लिए सार्वजनिक हलचलों में जुटा था। निषाद, केवट, धीवर वोटो की संख्या कालपी विधानसभा क्षेत्र में अच्छी खासी है। इस जददोजहद के बीच निषाद पीस पार्टी ने राकेश पाल को अपना उम्मीदवार बनाने का संकेत देकर कालपी क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया है। राकेश पाल राजनैतिक जगत में बुंदेलखंड में जाना-माना नाम है। वे झांसी के जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुके हैं। ब्रांड नाम के सहारे कालपी क्षेत्र में पालों को अपने साथ जोड़कर निषाद समाज अप्रत्याशित प्रदर्शन करने में कामयाब हो सकता है। भाजपा के साथ-साथ कांग्रेस खेमा भी इस युति से हलकान है। लेकिन पहले निषाद पीस पार्टी ने इस क्षेत्र में गोविंद पाल को उम्मीदवार बनाया था और अभी भी उनका टिकट काटने की घोषणा नही की गई है। पार्टी के जिलाध्यक्ष मनोज निषाद का कहना है कि उनका हाईकमान जल्द ही राकेश पाल और गोविंद पाल में से एक का नाम फाइनल कर देगा।







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