08orai05 08orai06 08orai07 08orai08 08orai09 08orai10उरई। विधानसभा चुनाव की सरगर्मिया बुलंदी पर पहुचती जा रही है ऐसे मे मतदाताओ की निगाह उन दिग्गजों को खोजने मे लगी है जिनको राजनीतिक कर्मक्षेत्र का कद्दावर खिलाड़ी माना जाता रहा है । इन सियासी लड़ाकों की सुनयोजित गुमशुदगी किनके समीकरण बिगाड़ेगी और किनपर होंगे ये मेहरबान इसे लेकर अटकलों का बाजार गर्म है
माधौगढ़ विधानसभा क्षेत्र के चुनाव अभियान मे लापता दिग्गजों की संख्या सबसे ज्यादा है इस मामले मे सर्वाधिक रहस्य भाजपा मे गहराया हुआ है । पूर्व विधायक संतराम सिंह सेंगर , हरिओम उपाध्याय ,और केशव सिंह सेंगर तीनों वर्तमान मे भाजपा मे है लेकिन पार्टी प्रत्याशी मूलचन्द्र निरंजन के जन संपर्क मे अभी तक इनमे से कोई नजर नहीं आ रहा है। कालपी से गत चुनाव मे बसपा के टिकट पर करारी टक्कर देने वाले संजय भदौरिया भी इस समय भाजपा मे है लेकिन वे चुनाव मे क्या भूमिका निभा रहे है यह कोई नहीं जान पा रहा है। सपा से भाजपा मे शामिल हुए शीतल सिंह सेंगर भी टिकट की दौड़ मे थे और प्रत्याशी की घोषणा के पहले वे पार्टी के कार्यक्रमों मे बढ़-चढ़ कर योगदान करते रहे थे लेकिन उन्हौने भी उदासीनता ओढ़ रखी है।
समाजवादी पार्टी से माधौगढ़ मे गत चुनाव मे केशवेन्द्र सिंह उम्मीदवार थे जिन्होने 50 हजार से अधिक वोट हथियाए थे और दूसरा स्थान प्राप्त किया था। लेकिन वे भी वर्तमान चुनावी परिदृश्य से गायब है । समाजवादी पार्टी के पूर्व घोषित प्रत्याशी लाखन सिंह कुशवाहा गठबंधन मे पार्टी द्वारा यह सीट कांग्रेस के हवाले किए जाने के पहले माधौगढ़ क्षेत्र का चप्पा चप्पा छान मारा था अपनी इस मेहनत का फायदा वे किसे देना चाह रहे है यह प्रश्न भी फिलहाल अबूझ पहेली बना हुआ है। माधौगढ़ के वर्तमान बसपा विधायक संतराम कुशवाहा ने बसपा से टिकट काटे जाने पर पार्टी के खिलाफ बगावत तो नहीं की लेकिन वे भी मौजूदा प्रत्याशी गिरीश अवस्थी के साथ दिखने की वजाय घर बैठे हुए है।
कालपी मे सपा के पिछले चुनाव के प्रत्याशी विष्णु पाल सिंह नन्हू राजा अदृश्य है। तीन वार इस क्षेत्र की नुमाइंदगी कर चुके पूर्व कैबिनेट मंत्री श्रीराम पाल ने भी अपने को चुनावी मौषम मे न्यूट्रल गियर मे दाल लिया है। सपा से बगावत करके इस क्षेत्र मे अपनी उम्मीदवारी का दम भरने वाले राकेश पाल का पर्चा तो खारिज हो गया है लेकिन पिछले चुनाव मे उमाकांती सिंह को जितवाने मे अहम भूमिका अदा करने वाले पाल समाज के आ मन मे उन्हौने जो फितूर पैदा कर दिया है उसका क्या असर होता है यह देखने वाली बात होगी।
उरई सुरक्षित सीट से कोंच के पूर्व विधायक अजय सिंह पंकज को बसपा ने 2 साल पहले से उम्मीदवार घोषित कर रखा था लेकिन आखरी समय उन्हे पवेलियन मे लौटा कर बसपा ने पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष विजय चैधरी को टिकट थमा दिया है । अजय पंकज के हाव भाव से तय है कि वे विजय चैधरी के लिए काम तो नहीं करेंगे लेकिन विजय चैधरी के चुनाव मे अगर उन्होने भितरघात किया तो विजय का बड़ा नुकसान हो सकता है इसलिये उनकी भूमिका की निगहवानी भी लाजमी है। उरई सीट पर समाजवादी पार्टी ने मौजूदा विधायक दयाशंकर वर्मा से किनारा कर महेंद्र कठेरिया को उम्मीदवार बना दिया है जिससे नाराज दयाशंकर निर्दलीय पर्चा भर चुके है। अब देखना यह है कि वे चुनाव मैदान मे डटे रहेंगे या मान मन्नौवल और दवाव के आगे पसीज कर नाम वापसी के दिन बेक हो जाएँगे।

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