उरई। चौथे चरण में जिले में मतदान होना है। चंद दिन शेष रह गए हैं। चुनावी गलियारों में गरमाहट का माहौल है। चुनाव में सपा व कांग्रेस गठबंधन को मजबूती देने के लिए शनिवार को सूबे के मुख्यमंत्री व सपा मुखिया अखिलेश यादव उरई आ रहे हैं। यहां पर वह टाउन हाल मैदान में सभा को संबोधित करेंगे। शुक्रवार को इस सभा की सभी तैयारियों को तो दुरुस्त कर लिया गया पर अब सपाइयों के आगे सीएम की सभा में भीड़ जुटाने की चुनौती है। इसी जद्दोजहद में सपाई दिन भर जुटै रहे। इस सभा को लेकर सपा व कांग्रेस प्रत्याशियों को काफी उम्मीदें हैं और यह सभा काफी हद तक चुनाव का रुख भी तय करेगी। इसके चलते सपाई व कांग्रेसी भी इसे सफल बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते हैं। अब देखना यह है कि शनिवार को होने वाली सीएम की सभा कितना असर दिखाती है? जिले में समाजवादी पार्टी भीषण गुटबाजी से जूझ रही है। पार्टी के अंदर आधा दर्जन से अधिक गुट बन चुके हैं या यूं कहें कि पार्टी का हर एक बडा नेता किसी न किसी गुट का नेतृत्व करता हुआ नजर आता है। वहीं गठबंधन के चलते भी सपा को जिले की दो विधानसभा सीटें गंवानी पड़ी और वह कांग्रेस के खाते में चली गईं। इसे लेकर भी सपा कार्यकर्ताओं व नेताओं में नाराजगी देखी गई। रही सही कसर प्रदेश नेतृत्व ने जिले की एक मात्र सीट पर प्रत्याशी चयन को लेकर दिखाई गई अकुशलता ने पूरी कर दी। समाजवादी पार्टी जिले में मात्र उरई सीट पर चुनाव लड़ रही है। इस एक सीट पर भी टिकट बांटने में करीब आधा दर्जन बार फेरबदल हुआ। नामांकन के आखिरी दिन तक सपा ने अपने प्रत्याशी चयन में फेरबदल किया और अंततोगत्वा सदर विधायक का टिकट काटकर एक नए चेहरे को मैदान में ला दिया। इससे पार्टी में और भी नाराजगी फूट पड़ी। अब मतदान से चंद दिन पहले मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की सभा उरई के टाउन हाल मैदान में होने वाली है। प्रशासनिक स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था व अन्य तैयारियों को तो पूरा कर लिया गया है पर इस सभा में भीड़ कैसे जुटाई जाए इसे लेकर जद्दोजहद जारी है क्योंकि सपा के कार्यकर्ताओं में जिस तरह का असंतोष देखने को मिल रहा है उससे तो यही अंदाजा लगाया जा रहा है कि पार्टी के असंतुष्ट कार्यकर्ता व नेता इस सभा से किनारा कर सकते हैं। वहीं गठबंधन से उत्साहित कांग्रेसियों को भी इस सभा से काफी उम्मीदें हैं और वह इसे सफल बनाने के प्रयास में हैं पर समस्या यह है कि कांग्रेस पार्टी रसातल में है उनके पास कार्यकर्ताओं का अकाल सा है। चाहकर भी वह ज्यादा कुछ न कर पाने की स्थिति में हैं। कहने को वर्तमान में कांग्रेस के पास जिले से एक विधायक के तौर पर उमाकांती कालपी से हैं पर उन्होंने पार्टी के बूते पर नहीं बल्कि व्यक्तिगत छवि की वजह से जीत हासिल की थी। चुनाव जीतने के बाद भी वह पार्टी में जान फूंकने का काम नहीं कर पाईं। अब इसका खामियाजा इस चुनाव में भुगतना पड सकता है। बहरहाल सपा के नाराज कार्यकर्ताओं के अलावा अन्य दलों की निगाहें भी इस सभा पर लगी हुई हैं और वह भीड़ के आंकलन लगाने के बाद हार-जीत का गणित बैठाएंगे। पर इतना तो तय है कि अगर सीएम की इस सभा में भीड़ कम रही तो इसका असर कांग्रेस व सपा प्रत्याशियों पर पड़ सकता है।

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