0 सरकारी चावल को लेकर तीन के विरुद्ध आवश्यक वस्तु अधिनियम में एफआईआर
konch2कोंच-उरई। दो दिन पूर्व अधिकारियों द्वारा रास्ते में पकड़े गये सरकारी चावल के ट्रैक्टर को सीज कर दिया गया है और चावल एक कोटेदार की सुपुर्दगी में दे दिया गया है। यहां दिलचस्प यह है कि सारे मामले में बड़ा फील गुड हो चुका था और सब कुछ पर्दे के पीछे से खेल चल रहा था लेकिन चावल छूट पाता इससे पहले ही बात लीक आउट हो गई और चावल के अवैध क्रय विक्रय में आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत टै्रक्टर मालिक के खिलाफ एफआईआर के आदेश करने पड़े, लेकिन सौ बात की एक बात यह भी है कि चावल उस ट्रैक्टर में आया कहां से, इसे फिलहाल दबाने का प्रयास किया जा रहा है।
दो दिन पहले शाम के धुंधलके में कोंच की ओर से एक ट्रैक्टर ट्रॉली में परचून का सामान भर कर नदीगांव थाना क्षेत्र के ग्राम लोहई जा रहा था। मुखबिर से मिली सटीक सूचना पर स्थानीय अधिकारियों ने पंचानन चैराहे के पास उक्त ट्रैक्टर रोक कर जब तलाशी ली तो उसमें छह कुंतल ऐसा चावल पकड़ में आया जो सरकारी था। अपने को घिरा देख ट्रैक्टर चालक मौके से भाग निकलने में कामयाब रहा। चावल माफिया ने किसी तरह मामले को सुलटाने का प्रयास भी किया और वह कामयाब भी हो गया जिसके चलते बताया गया है कि इसमें बड़ा फील गुड भी हो चुका था और चावल छूट भी जाता लेकिन किसी तरह यह खबर लीक आउट होकर मीडिया तक जा पहुंची जिसके चलते मामले की जांच करके आपूर्ति निरीक्षक अखिलेश सरोज ने ट्रैक्टर की मालिक शीला यादव पत्नी बलसिंह यादव, बलसिंह यादव पुत्र हंसराज यादव निवासी ग्राम लोहई थाना नदीगांव तथा अज्ञात ट्रैक्टर चालक के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3ध्7 में मामला पंजीकृत कर लिया गया है। आपूर्ति निरीक्षक ने माना है कि उक्त चावल सरकारी हो सकता है जिसे सरकारी बोरियों से जूट एवं प्लास्टिक की बोरियों में पल्टी किया गया है।
क्या चावल माफिया को बचाने का प्रयास हो रहा है ?
इस समूचे प्रकरण में चावल माफिया को बचाने के प्रयासों का साफ पता चल रहा है। सरकारी चावल की कालाबाजारी में संलिप्त माफिया का नाम इस प्रकरण में नहीं आने से यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या फील गुड के बाद माफिया का नाम छिपाया गया है? दरअसल सरकारी मशीनरी भी अपने हिसाब से ही सारा काम करती है, किसे फंसाना है और किसे बचाना है यह सब कुछ दाल में घी की मात्रा पर निर्भर करता है। यहां पकड़े गये सरकारी चावल में पूरी जांच हो गई और तीन लोगों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की जा चुकी है लेकिन चावल आया कहां से, यह अभी भी गोलमोल है। अगर चावल माफिया का नाम सामने नहीं आता है जैसा कि पूरा अंदेशा इसी बात का है, तो माना जायेगा कि प्रशासन उसे बचाने का प्रयास कर रहा है। चालक का नाम जानबूझ कर इसलिये छिपाया जा रहा है ताकि वह चावल कहां से आया का राज न उगल दे। ट्रैक्टर मालिक के बेटे पुष्पेन्द्र का यह बयान भी हजम नहीं हो रहा है कि उसे नहीं मालूम कि उसके ट्रैक्टर पर ड्राइविंग कौन कर रहा था।

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