0 महीनों से कुत्ता काटे के इंजेक्शनों का अस्पताल में है टोटा
konch1कोंच-उरई। अव्यवस्थाओं का पर्याय बन चुके सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में न केवल दवाओं और जरूरी इंजेक्शनों का टोटा है बल्कि वहां पसरी गंदगी पर भी शनिवार को एडी स्वास्थ्य झांसाी मंडल डॉ. एसबी मिश्रा खूब बिफरे, कहा कि अस्पताल में गंदगी से तो बीमारियों को और भी न्यौता मिलेगा। उन्होंने लैब, लेवर रूम, दंत चिकित्सा कक्ष, स्टॉक रूम आदि का बारीकी से निरीक्षण किया जिसमें मिली खामियां दूर करने के निर्देश उन्होंने सीएचसी प्रबंधन को दिये। अस्पताल परिसर और भवन में भी पसरी गंदगी देख भी उनका पारा चढा और साफ सफाई ठीक ढंग से रखने के लिये निर्देशित किया।
शनिवार को एडी स्वास्थ्य डॉ. एसबी मिश्रा और जेडी स्वास्थ्य डॉ. रेखारानी ने सीएचसी कोंच का औचक निरीक्षण किया जिसमें उन्हें तमाम खामियां मिलीं। हालांकि अस्पताल प्रशासन ने दवायें पर्याप्त मात्रा में होने का दावा किया लेकिन मरीजों की अगर मानें तो दवाओं का वहां भारी टोटा है। एडी और जेडी के निरीक्षण में कुत्ता काटे के इंजेक्शन महीनों से स्टॉक में नहीं होने की बात जब सामने आई तो रटा रटाया जबाब सामने आया कि डिमांड भेजी जा चुकी है। मंडलीय अधिकारियों ने सीएचसी के कोने कोने का निरीक्षण किया तो हर जगह गंदगी के अंबार मिले जिन्हें देख भड़के अधिकारियों ने साफ सफाई ठीक ढंग से रखने के कड़े निर्देश सीएचसी प्रबंधन को दिये। उन्होंने स्टॉक रूम, लेवर रूम, लैब, दंत चिकित्सा कक्ष आदि का भी निरीक्षण किया। कर्मचारियों की उपस्थिति को लेकर बताया गया कि कुछ कर्मचारी गैरहाजिर हैं जिन्हें समय से आने के निर्देश दिये गये। इस दौरान सीएचसी प्रभारी डॉ. आरके शुक्ला, डॉ. सीएल बघेल, ब्रजेश सिंह आदि मौजूद रहे।
बीमार पशु अस्पताल को है इलाज की जरूरत
0 दवायें नहीं होने से नहीं हो पा रहा मवेशियों का इलाज
konch2आदमियों और पशुओं के इलाज के लिये सरकार ने पूरा तंत्र बिठा रखा है, अस्पतालों में डॉक्टरों के अलावा अन्य कर्मचारियों का पूरा अमला वेतन हर महीने निकालता है, दवाओं पर भी करोड़ों का खर्चा होता है लेकिन इलाज के नाम पर खुद अस्पताल जब बीमार हों तो आदमियों या मवेशियों का इलाज कैसे हो, यह बड़ा सवाल है। यहां तहसील के समीप अवस्थित राजकीय पशु चिकित्सालय एवं गर्भाधान केन्द्र का बुरा हाल है। अव्वल तो यहां स्टाफ अपने दायित्वों का निर्वहन करने में पूरी तरह अक्षम है, ऊपर से अगर बीमार मवेशी आ जाये तो अस्पताल में मरहम पट्टी तक की व्यवस्था नहीं होना इसके होने न होने पर सवाल तो खड़े करेगा ही। शनिवार को कस्बे के सुभाषनगर में एक आवारा गाय बुरी तरह घायल रास्ते में पड़ी थी, गौरक्षा दल के आशुतोष रावत अपने वालंटियर्स के साथ गाय का इलाज कराने अस्पताल पहुंचे तो उन्हें यह कर टरका दिया गया कि उनके पास कोई दवा नहीं है। इस बाबत जब अस्पताल प्रभारी डॉ. रमेेशसिंह बाहर हैं, उनसे फोन बात की गई तो उनका यह कहना और भी हास्यास्पद लगा कि उक्त कर्मचारी चुनाव ड्यूटी की खुमारी में होगा इस लिये ऊलजलूल बात कर रहा है। बहरहाल, गाय को इलाज नहीं मिल सका।
नहीं मिली अस्पताल में दवायें
konch3कस्बे के आजाद नगर की रहने वाली महिला शबाना बेगम अपना इलाज कराने सीएचसी गई थी। चिकित्सक को दिखाने के बाद जब पर्चा लिखा गया और वह दवा लेने दवा कक्ष में पहुंची तो उससे कहा गया कि ये दवायें अस्पताल में नहीं हैं, इन्हें बाहर से लेना पड़ेगा। दवा काउंटर पर यह जबाब पाकर महिला काफी मायूस हो गई लेकिन उसके पास बाहर से दवा खरीदने के अलावा कोई और चारा नहीं था। उसने कहा है कि सरकार अस्पतालों में दवायें उपलब्ध होने के लाख दावे करे लेकिन सही बात तो यह है कि गरीबों को जब दवायें ही नहीं मिलेंगीं तो सरकारी दावों की कलई तो स्वयं ही खुल कर सामने आ गई है।

सरकार को बंद कर देना चाहिये अस्पताल
konch4पूर्व बारसंघ अध्यक्ष भी स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति देख कर काफी दुखी हुये। घायल गाय के इलाज के लिये वह भी गौरक्षा दल के सदस्यों के साथ पशु चिकित्सालय गये थे लेकिन अस्पताल कर्मी का जबाब उन्हें भी हैरान करने वाला था। उनका कहना है कि जब दवायें ही नहीं उपलब्ध हैं या अगर आती भी हैं और उन्हें पीछे के रास्ते से बाहर की हवा दिखा दी जाती है तो ऐसे में इन अस्पतालों का औचित्य ही क्या रह जाता है। सरकार बेकार में इसमें तैनात अधिकारियों या कर्मचारियों पर जनता की गाढी कमाई से भरने वाले सरकारी खजाने से वेतन के नाम पर लुटा देती है, इन अस्पतालों को बिल्कुल बंद कर देना चाहिये।

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