
कोंच-उरई। सरकार के काम किया है काम करेंगे के लाख दावों के बीच सूखी पड़ी नहरें और माइनरें किसानों का मजाक सा उड़ाती लग रहीं हैं। सिंचाई के अभाव में गेहूं की फसलें सूख कर कांटा हुई जा रहीं हैं और किसान अपनी किस्मत को कोस रहा है। यहां सिकरी रजवहे में पानी नहीं आने के कारण तकरीबन पांच सौ एकड़ फसलें तबाही की कगार पर हैं, किसानों का कहना है कि समय तो तीसरे पानी का है लेकिन दूसरे पानी के ही लाले पड़े हैं।
कुठौंद माइनर से निकलने वाले सिकरी रजवहे से जुझारपुरा, हिंगुटा, खकल, भदेवरा, चचेंड़ा, नगेपुरा समेत तमाम गांवों के हजारों एकड़ खेतों की सिंचाई होती है। इस वक्त गेहूं की फसलों में पानी की बहुत आवश्यकता है लेकिन रजवहे में पानी नहीं आने के कारण फसलें बुरी तरह सूख रहीं हैं। जुझारपुरा के किसानों की अगर मानें तो यह समय तीसरा पानी लगाने का है लेकिन अभी तक दूसरी भी सिंचाई नहीं हो सकी है। रजवहे में पानी छोडने की मांग लगातार की जा रही है लेकिन नहर विभाग के कानों पर जूं भी नहीं रही है। पानी के अभाव में तकरीबन पांच सैकड़ा एकड़ गेहूं की फसलें तबाह होने के मुहाने पर हैं। जुझारपुरा निवासी किसानों लखनलाल, रामदास, कृष्ण कुमार, महेन्द्र, रामस्वरूप आदि ने कहा है कि यदि जल्दी ही रजवहे में पानी नहीं छोड़ा गया तो किसान दाने दाने को मोहताज हो जायेगा।
इंसेट में-
ग्राम चमेंड़ निवासी प्रदीप कुशवाहा का कहना है कि समय से किसानों के खेतों को पानी नहीं मिल पाना बड़ी समस्या है, अधिकांश नलकूप भी खराब पड़े हैं जिसके चलते खेतों की प्यास नहीें बुझ पा रही है और यह स्थिति किसानों की बर्बादी की कहानी लिखने के लिये काफी है। उन्होंने सिकरी रजवहे में तुरंत पानी छोड़े जाने की मांग की है।
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ग्राम गोरा निवासी नरेश पाठक कहते हैं कि सिंचाई विभाग का नहरों, माइनरों और रजवहों में पानी छोड़े जाने का कोई कारगर शैड्यूल नहीं होने का खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ता है। उन्होंने माना कि जब पानी की जरूरत खत्म हो जाती है तब पानी छोड़ा जाता है जिससे खेतों की फसलें पानी में डूब जाती हैं और नुकसान ही नुकसान होता है।
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ग्राम सामी निवासी सतीश परिहार भी खेतों की सिंचाई नहीं हो पाने के कारण काफी दुखी हैं। उनका कहना है कि इस वक्त गेहूं की फसलें खेतों में हैं और किसान की साल भर की रोटी की गारंटी यही फसलें हैं लेकिन अफसोस जनक है कि रजवहे सूखे पड़े हैं और गेहूं की फसल किसानों को अपने हाथों से निकलती दिख रही है। उन्होंने रजवहे में पानी छोड़े जाने की जरूरत बताई है।







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