konch8कोंच-उरई। जाने माने साहित्यकार सुरेन्द्र नायक का एक और उपन्यास नेफ्रो वार्ड लोगों के हाथों में है। स्वाभाविक रूप से सामाजिक विमर्श पर अपनी लेखनी चलाने के लिये विख्यात नायक के इस नवोदित उपन्यास को लेकर लोगों के मन में उत्सुकता है कि अबकी बार उन्होंने किस विषय को लेकर अपना नजरिया दिया होगा। ऐसे सुधी पाठकों के लिये यह बता देना समीचीन होगा कि उपन्यास की विषय वस्तु महिलाओं की संघर्ष शीलता, उनके शोषण और उनसे उबरने की जिजीविषा लिये हुये है।
नेफ्रो वार्ड उपन्यास मूलतः स्त्री पुरुष संबोधों पर केन्द्रित है। इसमें एक ऐसी युवती की कहानी है जिसकी किडनियां फेल हो चुकी हैं। उसका लिव इन पार्टनर उसके इलाज के लिये अपना सब कुछ दांव पर लगा देता है। उस युवती की जिंदगी में उसकी दो बेटियां और एक प्रेमी भी है, पूरा उपन्यास पूर्व दीप्ति में चलता है। स्मृतियों और संभावनाओं के सहारे चलता हुआ यह उपन्यास तीनों कालों में संक्रमण करता है। इसमें एक तरफ जीवन संघर्ष, अदम्य साहस, आज्मघात की सीमा तक त्याग और प्रबल जिजीविषा है तो दूसरी तरफ मानवीय संबंधों के घात-प्रतिघात हैं। यह उपन्यास स्त्री पुरुष संबंधों को उग्र नारी विमर्श के बरक्स पुरुष विमर्श के दृष्टिकोण से भी विश्लेषित करता है। यह इस उपन्यास की उपादेयता भी है और वैशिष्टय भी।

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