0 मामला दलित की हत्या के आरोपियों की गिरफ्तारी में पुलिस पर टाल मटोल का आरोप
konch1कोंच-उरई। तकरीबन एक माह पूर्व सर्किल के एट थाना क्षेत्र के ग्राम जमरोही कलां में दलित अधेड़ भगवानदास की हत्या की सनसनी खेज वारदात के बाद जहां गांव में अभी भी लोग दहशत से उबर नहीं पाये हैं वहीं हत्याभियुक्तों के छुट्टा घूमने से मृतक के परिजनों में भय व्याप्त है। मृतक के बेटे लखपतसिंह ने डीआईजी को पत्र भेज कर पुलिस द्वारा अभियुक्तों की गिरफ्तारी में टाल मटोल का आरोप लगाया है, मंगलवार को उसने गांव के अन्य लोगों के साथ यहां सीओ कार्यालय के बाहर मीडिया को भी इस पत्र की प्रतियां देकर अपनी व्यथा बताई और बाहर घूम रहे अभियुक्तों की शीघ्र गिरफ्तारी की मांग की है।
गौरतलब है कि गुजरी 15 जनवरी 2017 को एट थाना क्षेत्र के ग्राम जमरोही कलां में पूर्व प्रधान ज्ञानसिंह कुशवाहा ने अपने साथियों मानवेन्द्र पुत्र राज बहादुर ठाकुर निवासी मड़ोरा थाना पूंछ आदि के साथ मिल कर अपने ही घर में नृशंस हत्या कर दी थी और लाश को गांव के तालाब के किनारे पर ठिकाने लगा दिया था। दिलचस्प यह है कि दो दिन तक भगवानदास की लाश पूर्व प्रधान के घर में ही रही और दो दिन बाद रात के किसी वक्त उक्त लाश को ठिकाने लगाया गया था। हालांकि बाद में सारा मामला खुल कर सामने आ गया था और लाश भी बरामद कर ली गई थी। मृतक के पुत्र लखपतसिंह की तहरीर पर एट थाना पुलिस ने पांच लोगों ज्ञानसिंह कुशवाहा पुत्र घनाराम, रामकुमार, शिवकुमार पुत्रगण ज्ञानसिंह, पंकज पुत्र महाराजसिंह निवासी ग्राम जमरोही कलां तथा मानवेन्द्र पुत्र राजबहादुर निवासी ग्राम मड़ोरा थाना पूंछ जिला झांसी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ज्ञानसिंह व मानवेन्द्रसिंह को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था लेकिन तीन अभियुक्त अभी भी खुले में घूम रहे हैं और मृतक के परिजनों को धमका रहे हैं जिसके कारण उनमें भय व्याप्त है। मृतक के बेटे लखपत ने अनुसूचित जाति जन जाति आयोग दिल्ली और लखनऊ के अलावा डीआईजी और पुलिस अधीक्षक को पत्र भेज कर सीओ पर सीधा आरोप लगाया है कि वे अभियुक्तों को बचाने का प्रयास कर रहे हैं।
आखिर पुलिस क्यों नहीं दर्ज कर रही हत्या का मुकदमा
0 मटर के चैदह लाख के भुगतान का तगादा करने को लेकर हुई थी हत्या
0 अधेड़ की मौत के बाद आरोपी सीएचसी में छोड़ भागे थे लाश
konch2गुजरी 18 फरवरी की सुबह सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में कुछ लोग एक अधेड़ की लाश छोड़ भागे थे, उक्त लाश कोतवाली क्षेत्र के ग्राम खकल्ल के रहने वाले केशवसिंह गुर्जर उर्फ बाबा की थी। बाबा किसानों की मटर थोक व्यापारी के यहां बिकवाने में मध्यस्थ की भूमिका निभाता था। मृतक के परिजनों ने थोक व्यापारी और उसके कतिपय साथियों के ऊपर हत्या का आरोप आयद करते हुये कोतवाली में तहरीर दी थी लेकिन उक्त मामले में हत्या का मुकदमा आज तक नहीं लिखा जाना हैरान करने बाला है। पोस्टमॉर्टम में मृतक का विसरा परीक्षण के लिये भेजा गया है। मृतक के भाई और मुकदमे के वादी इंद्रपालसिंह का आरोप है कि पुलिस मामले को टालने में लगी है।
कोतवाली क्षेत्र के ग्राम खकल्ल निवासी इंद्रपाल सिंह पुत्र कोकसिंह गुर्जर ने पुलिस को प्रार्थना पत्र देकर बताया था कि उसका बड़ा भाई केशवसिंह उर्फ बाबा पुत्र कोकसिंह किसानों की मटर बिकवाने में मध्यस्थ की भूमिका निभाता था और कोंच के आढतियों हसनखां, हनीफखां व बबलू की आढत पर माल तौलवाता था। बताते हैं कि इन आढतियों पर किसानों का लगभग चैदह लाख रुपया बकाया था जिसका तगादा केशवसिंह इनसे अक्सर करता रहता था लेकिन ये लोग कोई न कोई बहाना कर टरका देते थे, जबकि किसान केशवसिंह पर पैसा दिलाने के लिये दबाव बना रहे थे। गुजरी 17 फरवरी शुक्रवार को सुबह लगभग आठ बजे हसनखां व हनीफखां केशव के घर खकल्ल पहुंचे और केशव से कहा कि चलो आज पूरा पैसा दिलवा देंगे। इसके बाद केशव उनके साथ मोटर साइकिल पर कोंच चला गया। परिजनों की अगर मानें तो उस समय केशव के पास एक लाख बाईस हजार रुपया भी जेब में पड़ा था। इसके बाद केशव की लाश ही सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र कोंच में मिली थी। परिजनों के मुताबिक हसनखां व हनीफखां उसकी लाश सीएचसी में छोड़ कर भाग गये थे। परिजनों ने केशव की हत्या की आशंका जताई थी जिस पर शव को पोस्टमॉर्टम के लिये भेजा गया था। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट भी अब तक मृतक के परिजनों को नहीं उपलब्ध कराई गई है। पुलिस के मुताबिक मृतक का विसरा परीक्षण के लिये भेजा गया है। मंगलवार को कोतवाली पहुंचे मृतक के भाई इंद्रपाल ने आरोप लगाया है कि पुलिस मामले को टाल रही है और उसके भाई की हत्या की रिपोर्ट नहीं दर्ज कर रही है।
फोटो- मृतक का भाई इंद्रपालसिंह

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