उरई। कोटरा से मऊरानीपुर से जोड़ने वाले बेतवा के पुल के निर्माण की प्रगति पांच वर्ष से अधिक का समय गुजर जाने के बावजूद काफी सुस्त है। जिम्मेदार भले ही यह पुल 2018 तक कंपलीट किये जाने का दावा जता रहे हों लेकिन ऐसा लगता नही है कि उक्त पुल अभी 2020 तक भी पूरा हो पायेगा।
लोक निर्माण विभाग हो या राज्य सेतु निगम इसमें शिवपाल सिंह युग के अवशेष अभी भी बचे हुए हैं। इस युग की विशेषता यह रही है कि इसमें अभियंताओं को रिवाइज स्टीमेट पास कराने का इतना ज्यादा चस्का रहा कि उन्होंने कोई कार्य निर्धारित समय से पूरा नही होने दिया। उनकी दूसरी विशेषता यह है कि कार्य अधूरा छोड़कर पूरा पेमेंट उन्होंने अपनी जेब रख लेने की महारथ दिखाई है। सेतु निर्माण निगम के वर्तमान परियोजना प्रबंधक शिवपाल सिंह के बेहद चहेते रहे हैं। जिससे हर प्रोजेक्ट में उनकी धूर्त छाप नजर आती है। वर्तमान पीओ के नेतृत्व में बना उरई का रेलवे ओवर ब्रिज इसका उदाहरण है। राठ रोड ओवर ब्रिज के नाम से पहचाने जाने वाले इस पुल पर अगर हादसे नही हो रहे तो यह लोगों की खुशकिस्मती है। वैसे पुल का जो जिगजाग डिजाइन है वर्तमान परियोजना प्रबंधक गुप्ता ने तयशुदा बात है कि इंजीनियर की किसी पढ़ाई में इसे नही पढ़ा होगा। जिस देश और शहर की आबादी कम करानी है इस गुप्ता डिजाइन के ओवर ब्रिज ही वहां बनने चाहिए।
कालपी के नये यमुना सेतु को इनके निर्देशन में ऐसा बनाया गया है कि लगता है कि वह जन्मजात स्वानफ्लू की बीमारी से ग्रसित होकर इस दुनियां में आया है। इस पुल पर जितने दिनों यातायात नही चला उतने दिनों से ज्यादा का वक्त इसकी मरम्मत में लग चुका है। गिनीज बुक के सारे रिकार्ड इसके डिफैक्ट के आगे फैल हैं।
महेबा के पास यमुना पर पाल सरैनी का पुल तो शायद इस गुप्ता की करतूत के चलते सबसे लंबी मुददत के बाद बने पुल का दर्जा हासिल करेगा। कोटरा के बेतवा सेतु के संबंध में भी गुप्ताजी की महत्वाकांक्षाएं कुछ इसी तरह की हैं। भगवान गुप्ता के पीओ रहते सेतु निगम की जिले में चल रही परियोजनाओं का भला करे।





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