02orai01उरई। परिवहन विभाग की लापरवाही के चलते नये पुल और सड़क बन जाने के बावजूद कई व्यस्ततम् मार्गों पर यातायात के लिए सार्वजनिक वाहन आम लोगों को उपलब्ध नही हो पा रहे हैं। दूसरी ओर पड़ोसी राज्य के माफिया इन हालातों का लाभ उठाकर धड़ल्ले से बिना परमिट की बसें नये मार्गों पर चला रहे हैं जिससे उत्तर प्रदेश में सरकारी खजाने को प्रतिवर्ष लाखों रुपये की चपत झेलनी पड़ रही है।
माधौगढ़ के पास महाराजपुरा और रामपुरा के पास नरौल का पुल बन जाने के बाद इन क्षेत्रों की सीधी कनेक्टिविटी मछंड से होकर भिंड तक हो गई है। रामपुरा व माधौगढ़ क्षेत्र के लोगों की ज्यादातर रिश्तेदारियां भिण्ड जिले में हैं। इसके अलावा यहां व्यापार भी भिण्ड के बाजार से जुड़ा है। इसलिए प्रतिदिन इन मार्गों पर सैकड़ों लोगों का आवागमन होता है। फिर भी इन मार्गों पर परिवहन विभाग नये बस परमिट जारी करने में रुचि नही ले रहा।
उधर मध्य प्रदेश की राम-श्याम बस कंपनी जैसे आॅपरेटर बिना परमिट के 10 बसें उक्त रूट पर संचालित कर रहे हैं जिसमें उनको कोई टैक्स नही देना पड़ता। माधौगढ़ से पांच बसें महाराजपुरा होकर मध्य प्रदेश के लिए निकलती हैं, इनमें एक बस तो सुबह साढ़े पांच बजे कुठौंद से चलती है और कुठौंद से माधौगढ़ के लिए इस समय सवारियां भी खूब मिल जाती हैं। जबकि कोई टैक्स देना नही पड़ता। जिससे यह लोग हर्र लगे न फिटकरी, रंग चोखा जैसा मुनाफा कमा रहे हैं। रामपुरा में भी मध्य प्रदेश की पांच अवैध बसों के दो-तीन फेरे नरौल होकर लगते हैं।
मध्य प्रदेश के सेवा भावी बस आॅपरेटर अगर परिवहन विभाग की सेवा कर रहे हैं तो पुलिस को पूजा देने में भी संकोच नही बरत रहे। जिले के इनके रूट पर आने वाले थाने को इन बसों से अच्छी-खासी मंथली मिलती है इसलिए यह बस आॅपरेटरों को कोई असुविधा नही होने दे रहे। इतने जिम्मेदार विभागों की कायल शायद उत्तर प्रदेश सरकार भी बहुत है। इसीलिए इन पर कोई कार्रवाई नही हो रही है।

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