उरई। त्यौहार में जखीरेबाजों की बन आती है। होली में जमाखोर खोया में दाम के दूने नही चार गुने तक करने के अरमान संजोये हुए हैं। यही कारण है कि आम दिनों में 120 रुपये किलो से डेढ़ सौ रुपये किलों में आसानी से मुहैया खोया त्यौहार का दिन नजदीक आते-आते तीन सौ रुपये किलो से ऊपर का भाव छूने की ओर अग्रसर है।
बाजार के सूत्रों ने बताया कि जमाखोर व्यापारी 10 दिन पहले से बोली लगवाकर ग्रामीण दूधियों से मिटटी के मोल खोया खरीदकर इकटठा करने में जुट गये थे। इस समय खोया की कीमत ढाई सौ से 280 रुपये किलो से ऊपर वसूली जा रही है। खुद दुकानदार स्वीकार करते हैं कि त्यौहार से एक दिन पहले खोया का भाव सवा तीन सौ रुपये किलो तक हो सकता है।
खाद्य सुरक्षाधिकारी डाॅ. प्रियंका सिंह ने इस बारे में पूंछने पर कहा कि आढ़तियों व खोया दुकानदारों को चिन्हित कर छापे डाले जायेगें तांकि मिलावटी खोया बेचने वाले पकड़े जा सके। उन्होंने कहा कि सपरेटा, पामोलिन और पाउडर दूध से कृत्रिम खोया तैयार करने वालों के खिलाफ भी अभियान छेड़ दिया गया है। सिंथैटिक पनीर, सरसों के मिलावटी तेल और रंगीन चिप्स बेचने वालों पर भी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। उन्होंने कहा कि त्यौहार में ज्यादा पसंद की जाने वाली हर खाद्य सामग्री पर उनकी निगाह है।

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