0 केवल पानी नहीं होने की बजह से सब कुछ मटियामेट है
कोंच-उरई। यहां तहसील परिसर में बाहर की तरफ मुंह किये खड़ा सुलभ शौचालय पिछले एक साल से सफेद हाथी बना खड़ा है। लाखों की लागत से डूडा के अंतर्गत बना यह शौचालय केवल पानी की अनुपलब्धता के कारण अनुपयोगी सिद्ध हो रहा है।
तहसील परिसर में पूर्व की ओर मुंह किये खड़ा सुलभ शौचालय विगत चार वर्ष पूर्व डूडा के अंतर्गत लाखों की लागत से बन कर तैयार हुआ था। इसकी स्थापना का मकसद साफ था कि लोगों को इसकी सुविधा का लाभ मिले। चूंकि यह ऐसी सार्वजनिक जगह पर स्थापित है जहां तहसील में सैकड़ों लोगों का रोज ही आना जाना बना रहता है, दूसरे यहां कैलिया बस स्टैंड होने के कारण सैकड़ों यात्री भी यहां बसों की प्रतीक्षा में बैठे रहते हैं। इस शौचालय में पुरुषों के लिये छह लैट्रिन और स्नानागार तथा महिलाओं के लिये भी चार लैट्रिन और स्नानागार बने हैं। इसके अलावा राहगीरों के लिये यूरीनल की भी व्यवस्था अलग से है। यहां रामकिसुन बाल्मीकि नामक एक केयर टेकर भी रहता है लेकिन पिछले एक साल से यह शौचालय पूरी तरह से बंद पड़ा है। इसमें साफ सफाई भी नहीं हो रही है, गंदगी चारों तरफ अपने पैर पसारे है, कुल मिला कर यह मौजूदा समय में बिल्कुल अनुपयोगी सिद्ध हो रहा है और लोगों को प्रसाधन के लिये इधर उधर भटकना पड़ता है। बताया गया है कि इसके बंद होने का कारण इसमें पानी की व्यवस्था नहीं होना है। पानी की आपूर्ति के लिये तहसील प्रशासन ने एक इंडिया मार्का हैंडपंप जो इस शौचालय के ठीक पीछे स्थापित है, में समर्सिबल डाल रखी थी जिसका कनैक्शन शौचालय पर रखी टंकी में भी जाता है, लेकिन उक्त समर्सिबल पिछले एक साल से खराब पड़ी है और तभी से शौचालय की उपयोगिता भी निष्प्रभावी हो चुकी है। गौरतलब यह भी है कि चुनाव के दौरान भी इस शौचालय को चालू नहीं कराया जा सका था।
इंसेट में-
रखरखाव में दम तोड रहीं हैं जन सुविधायें
नगर के निवासी नारेत्तम स्वर्णकार का कहना है कि सरकार लाखों खर्च करके जन सुविधायें मुहैया कराती है लेकिन रखरखाव के अभाव में वे सुविधायें दम तोड़ती नजर आती हैं। सुलभ शौचालय का निर्माण इसलिये कराया गया था ताकि लोगों, खासतौर पर ग्रामीण अंचलों और बाहर से आने जाने बालों को इसकी सुविधा का लाभ मिल सके लेकिन दम तोड़ती व्यवस्थाओं के कारण यह सफेद हाथी में तब्दील हो गया है। उन्होंने अविलंब इसे चालू कराने की मांग की है।
लाखों के खर्च के बाद भी बदहाली का शिकार
समाजवादी पार्टी के पूर्व नगर अध्यक्ष गुफरान अहमद सिद्दीकी भी सुलभ शौचालय के बंद होने को आम जनता को मिलने वाली सुविधाओं में खलल मानते हैं, उनका कहना है कि शौचालय बंद होने के कारण इसके निर्माण का औचित्य ही समाप्त सा हो गया है। ताज्जुब तो इस बात का है कि यह तहसील परिसर में स्थित होने के बाबजूद रखरखाव के मामले में अनदेखी का शिकार है। उन्होंने भी इसे शीघ्र ही चालू कराने की मांग की है।
फोटो-कोंच5-गुफरान अहमद सिद्दीकी
संज्ञान में आया है, शीघ्र ही इसे चालू करायेंगे
तहसीलदार भूपाल सिंह से जब इस बाबत पूछा गया तो उन्होंने कहा कि शौचालय खराब होने की उन्हें जानकारी नहीं थी, अब यह उनके संज्ञान में बात आई है तो इसे जल्दी ही चालू कराया जायेगा।





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