0 गुलाबी गिरोह ने राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन दिया तहसीलदार को
कोंच-उरई। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर प्रति बर्ष महिलाओं के कल्याण की अपील के साथ विभिन्न कार्यक्रम महिलाओं से जुड़े आयोजित किये जाते हैं लेकिन फिर भी महिलाओं की स्थिति में कुछ ज्यादा फर्क आजादी के सत्तर सालों बाद भी नहीं आया है। यह कहना है महिलाओं की समस्याओं को लेकर अगुवाकार संगठन गुलाबी गिरोह का जिसकी आधा सैकड़ा महिलाओं ने तहसीलदार भूपाल सिंह को ज्ञापन देकर महिलाओं की स्थिति की ओर ध्यान खींचने का प्रयास किया है।
गुलाबी गिरोह की शीर्ष कमांडर अंजू शर्मा की अगुवाई में अंतराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर तकरीबन आधा सैकड़ा गुलाबी गिरोह की महिलायें गुलाबी साडियों में लिपटी और हाथों में हॉकी लिये नारेबाजी करतीं तहसील पहुंचीं। उन्होंने राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन तहसीलदार को देकर कहा कि महिला सशक्तिकरण को लेकर शासन और प्रशासन के स्तर से जो भी प्रयास किये जाते हैं वे मात्र औपचारिकताओं में सिमट कर रह जाते हैं, आजादी के सात दशक बीत जाने के बाद भी महिला आज भी अपने अस्तित्व को लेकर हाशिये पर खड़ी है और उनकी स्थिति में कोई बहुत ज्यादा सुधार नहीं हुआ है। ग्रामीण क्षेत्रों में तो स्थिति और भी खराब है, घरेलू हिंसा से लेकर सामाजिक हिंसा की शिकार महिला आज भी बलात्कार, छेड़छाड़ जैसी विभीषिका से जूझ रही है। ऐसी स्थिति में उसे पुलिस थानों से भी न्याय नहीं मिलना यह जताने के लिये काफी है कि वह दोयम दर्जे की जिंदगी जीने को मजबूर है। महिलाओं को सशक्त कानूनों का आवरण और दाषियों को कड़े दंड का प्रावधान जब तक नहीं होगा तब तक वह बेचारी बनी रहेगी। चुनावों में भी केवल प्रतीकों के रूप में वह अपनी उपस्थिति दर्ज करा पाती है और जब वह चुनाव जीत भी जाती है तो उसके तथाकथित प्रतिनिधि उसे पीछे धकेल कर खुद आगे आ जाते हैं। गिरोह का मानना है कि महिलाओं को कम से कम तेतीस फीसदी आरक्षण हर क्षेत्र में देकर ही उसे सामाजिक और राजनैतिक रूप से सक्षम बनाया जा सकता है। महिला की शिक्षा दीक्षा की भी समुचित व्यवस्था हो और उसे स्वावलंबन की दिशा में प्रोत्साहित करके ही उसे वास्तविक रूप में सशक्त किया जा सकता है। इस दौरान अंजू शर्मा, प्रवेशकुमारी, राजकुमारी, धनकुरा, रश्मि, ज्ञानवती, रामकली, सोमवती, मुन्नीदेवी, कुंती, कांति, सुशीला, सुनीता, नीलम, लक्ष्मी, रानी, ऊषा, भगवती, विमला, रंजीता, गोमती, गौना, बन्नो, सरोज आदि मौजूद रहीं।
महिलाओं को संगठित रहने की जरूरत है-अंजू
गुलाबी गिरोह की शीर्ष कमांडर अंजू शर्मा भले ही देहाती पृष्ठभूमि से आती हों लेकिन उन्होंने महिलाओं को उनके प्रति होने वाले उत्पीडन से लडने के लिये जो ताकत दी है उसे महिला सशक्तीकरण की दिशा में मील का पत्थर माना जा सकता है। बुंदेलखंड में गुलाबी गैंग की मुखिया संपत पाल से प्रभावित होकर गुलाबी गिरोह सुप्रीमो अंजू शर्मा ने घर की दहलीज लांघ कर संपत का गैंग 2008 में ज्वाइन किया था और बतौर जिला कमांडर उन्हें जनपद जालौन की कमान मिली थी जिसे उन्होंने बखूबी निभाया। इसके बाद उन्हें जब लगा कि संपत पाल गुलाबी गैंग के राजनीतिकरण कर रहीं हैं और महिला हितों को उन्होंने हाशिये पर ले जाकर पटक दिया है तो अंजू ने बर्ष 2010 में गुलाबी गिरोह खड़ा कर अपना अलग संगठन बना लिया और महिलाओं को उनके अधिकारों के बारे में न केवल जागरूक करने का काम किया बल्कि विभिन्न मंचों से उनके लिये आवाजें भी उठानी शुरू कर दीं। आज गिरोह में दसियों हजार महिलायें उनके साथ काम कर रहीं हैं।







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