उरई। जिले के मतदाताओं ने लोकसभा चुनाव की ही इबारत कमोवेश विधानसभा चुनाव में भी उतार दी। इसलिए जिन सयानों ने लोकसभा चुनाव के आंकड़े सहेजकर विधानसभा चुनाव के परिणाम आंके थे वे अपने अंदाजे को डिटो पाकर अपनी पीठ ठोंक सकते हैं।
अब देखिये लोकसभा चुनाव के आइने में विधानसभा के आज घोषित परिणामों की तस्वीर। उरई विधानसभा क्षेत्र में 2014 में भाजपा को 130520 मत मिले थे जबकि गौरी शंकर ने इस बार सांसद भानुवर्मा को पीछे छोड़ते हुए उरई क्षेत्र में 140485 मत हासिल किये। उरई में सुरक्षित सीट होने के कारण जानकार पहले से ही मान रहे थे कि यहां की सिचुएशन में 2014 में मिले मतों में कोई भी वर्ग भाजपा से खिसककर दूसरे पाले में जाने की गुंजाइश नही है बल्कि कोरी बिरादरी में भाजपा का समर्थन बढ़ जाने की ही संभावना आंकी गई थी। वजह यह थी कि लोक सभा चुनाव में जहां भाजपा के भानुवर्मा कोरी बिरादरी से संबंधित थे वही सपा प्रत्याशी घनश्याम अनुरागी का ताल्लुक भी कोरी बिरादरी से था। लेकिन इस बार भाजपा को छोड़कर किसी प्रमुख दल ने कोरी बिरादरी के प्रत्याशी को उम्मीदवार नही बनाया था। इसलिए यह अंदाजा लगाया जाना सही था कि कोरी बिरादरी एकजुट होकर भाजपा का साथ देगी और ऐसा हुआ भी।
जहां तक दूसरी पार्टियों की बात है उरई क्षेत्र में लोक सभा चुनाव के दौरान समाजवादी पार्टी को 25980 और कांग्रेस को 33727 मत मिले थे। ध्यान रखने वाली बात यह है कि लोक सभा चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार विजय चैधरी थे जिनको व्यक्तिगत लोकप्रियता की वजह से उस समय पार्टी की स्थिति के मुकाबले बहुत ज्यादा मत मिल गये थे। लेकिन कांग्रेस और सपा दोनों के वोट जोड़ दिये जाये ंतो भी सपा के वर्तमान प्रत्याशी महेंद्र कठेरिया को मिले 61606 मत कहीं ज्यादा हैं। जाहिर है कि कठेरिया जीत भले ही न पाये हो लेकिन उन्होंने मुकाबला जोरदार किया और शायद इसकी वजह मुस्लिम वोटों का उनकी ओर एक तरफा ध्रुवीकरण रहा। जहां तक बहुजन समाजपार्टी की बात है लोकसभा चुनाव में उसे 52349 मत मिले थे। जबकि मौजूदा चुनाव में पार्टी की झोली में 57541 मत पड़े। वैसे इस संबंध में यह गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव में उरई क्षेत्र में कुल 249862 मत पड़े थे। जबकि विधानसभा चुनाव में 264020 मत डाले गये।
कालपी विधानसभा क्षेत्र में लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा को 106720 मत मिल गये थे। लेकिन विधानसभा चुनाव में विरोधी पार्टियों से दो ठाकुर उम्मीदवार सामने आ जाने के कारण भाजपा के मतों में गिरावट पहले से तय मानी जा रही थी और ऐसा ही हुआ। लेकिन आश्चर्यजनक यह है कि यह गिरावट बहुत मामूली रही। भाजपा ने इस चुनाव में 105988 मत पाये। हालांकि एक तथ्य यह भी है कि इस क्षेत्र में भी लोकसभा चुनाव की तुलना में ज्यादा मत पड़े थे। 2014 के लोकसभा के चुनाव में कालपी सैगमैंट में 215614 लोगों ने मत प्रयोग किया था। विधानसभा चुनाव में यह संख्या बढ़कर 228711 हो गई।
कालपी में लोकसभा चुनाव में सपा को 33450 और कांग्रेस को मात्र 16155 मत मिले थे लेकिन विधानसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी उमाकांति सिंह ने अकेले 53160 मत झटक लिए। बसपा को लोकसभा चुनाव में 52102 मत मिले थे और विधानसभा चुनाव में भी यह मत बरकरार रहे। पार्टी के उम्मीदवार छोटे सिंह चैहान ने विधानसभा चुनाव में 54504 मत जुटाये।
माधौगढ़ में 2014 के लोकसभा चुनाव में पड़े 245733 मतों के मुकाबले 2017 में 251710 लोगों ने मत प्रयोग किया। यहां भी लोक सभा चुनाव में भाजपा को मिले 128594 मतों में कमी आना इसलिए तय था कि विरोधी दलों से दो ब्राहमण व एक मजबूत ठाकुर प्रत्याशी मैदान में आ गया था। अनुमान के मुताबिक भाजपा यहां 2017 का प्रदर्शन दोहरा पाने की बजाय 108732 मतों पर सिमट गई। दूसरी ओर बसपा लगभग यथावत रही। 2014 में बसपा को 62936 मत मिले थे और इस बार उसके पक्ष में 62752 मत जुटे। 2014 में इस सीट से सपा को 31998 और कांग्रेस को 14480 मत मिले। विधानसभा चुनाव में दोनों के गठबंधन के प्रत्याशी विनोद चतुर्वेदी को भी लगभग इतने ही 46915 मत मिल सके।
ये आंकड़े जाहिर करते हैं कि जिले के मतदाताओं पर प्रधानमंत्री मोदी का जादू लोकसभा चुनाव की तरह ही छाया रहा। इसलिए समीकरण बदल जाने के बावजूद भाजपा के मतों में कमी नही आई। प्रतिद्वंदी दलों के लिए आगामी चुनावों के दृष्टिगत् जिले की जनता का यह रुझान बदलना एक दुष्कर चुनौती की तरह है।

Leave a comment

Recent posts