0 लोकतंत्र सेनानी ब्रजेन्द्र मयंक रहे इस साल के महामूर्ख
0 बुंदेली संस्कृति एवं लोक कला संबर्द्धन संस्थान के तत्वाधान में संयोजत हुआ महामूर्ख सम्मेलन
0 रंगकर्मी स्व. ठाकुरदास वैद व स्व. राधेश्याम दांतरे को समर्पित रहा सम्मेलन
0 घंटों खीसें निपोरती रही हजारों मूर्खों की जमात
कोंच-उरई। होली के सतरंगी पर्व पर रविवार की दोपहर कस्बे के केलरगंज में बुंदेली संस्कृति एवं लोक कला संबर्द्धन संस्थान के तत्वाधान में गत वर्षों की भांति महामूर्ख सम्मेलन का आयोजन किया गया। आयोजन में हजारों की संख्या में मौजूद मूर्खों के बीच डठूला माथे पर और टिकली ठुड्डी पर अलंकृत कर दूल्हा वेश धारण किये जैसे ही मूर्खाधिराज पधारे, मूर्खों की जमात ने उनका जोरदार स्वागत किया, पारंपरिक बुंदेली वाद्य यंत्र रमतूला बजा कर मूर्खाधिराज को पूरा सम्मान बख्शा गया। मूर्खाधिराज और कोई नहीं, अपनी ऊल जलूल हरकतों के लिए अपनी पहचान कायम कर चुके लोकतंत्र सेनानी पत्रकार ब्रजेन्द्र मयंक थे। 44 बर्ष पूर्व महामूर्ख सम्मेलन की नींव के पत्थर जानेमाने वामपंथी विचारक स्व. ठाकुरदास वैद तथा पूर्व पालिकाध्यक्ष स्व. राधेश्याम दांतरे को समर्पित रहा आयोजन।
परंपरागत रूप से पिछले 44 बर्षों से अनवरत जारी इस महामूर्ख सम्मेलन में मूर्खाधिराज के साथ इलाकाई सांसद भानुप्रताप वर्मा, विधायक माधौगढ़ मूलचंद्र निरंजन, उरई सदर विधायक गौरीशंकर वर्मा, सीडीओ एसपी सिंह, अपर एसपी सुभाषचंद्र शाक्य, प्रोफेसर वीरेन्द्र सिंह, पूर्व ब्लॉक प्रमुख सुदामा दीक्षित, कढोरेलाल यादव बाबूजी, पूर्व बारसंघ अध्यक्ष ओमशंकर अग्रवाल, शिक्षा के क्षेत्र की जिले की नामचीन हस्ती कृपाशंकर द्विवेदी उर्फ बच्चू महाराज, विजय रावत, बादाम सिंह कुशवाहा, सुनील लोहिया, पवन दांतरे, शिक्षाविद् देवेन्द्र कुमार द्विवेदी, हरिश्चंद्र तिवारी, नरेन्द्र मयंक, डॉ. पीडी चंदेरिया, विक्कू शुक्ला, रामशंकर छानी, ओमप्रकाश उदैनिया समेत दर्जनों मूर्ख उनके बारातियों की तरह मंच पर ठुंसे थे। इसी दरम्यान वहां एसडीएम मोईन उल इस्लाम, सीओ नवीन कुमार नायक, कोतवाल देवेन्द्र द्विवेदी भी अपनी तशरीफ का टोकरा लिये कार्यक्रम में आ धमके तो आयोजन समिति के लोगों ने लगे हाथ उन्हें भी हाथों हाथ लेकर मंच पर पधरवाया और उनके कंठ में गजरे डाल कर उन्हें अपनी मूर्खता पर खुश होने का अवसर दे डाला। आयोजक संस्था के अध्यक्ष रमेश तिवारी, प्रबंधक पुरुषोत्तमदास रिछारिया, मंत्री नरोत्तम स्वर्णकार, संजय सोनी के साथ साथ आयोजन के कर्ताधर्ताओं डॉ. मृदुल दांतरे, अभिषेक रिछारिया पुन्नी, संदीप अग्रवाल, संजय दतिया, करुणानिधि शुक्ला, सौरभ मिश्रा, पवन गौतम, ऋषि झा, आनंद पांडे, सुमित झा, वीरेंद्र त्रिपाठी, राहुल राठौर, सूर्यदीप सोनी, अतुल शर्मा, बंटी गिरवासिया, जितेन्द्र सोनी, दुर्गेश कुशवाहा आदि ने मूर्खाधिराज के गले को कंठहारों से इतना भर दिया कि वे खुशी के मारे दूनर हो हो गये। संचालन श्रेष्ठ रंगकर्मी नरोत्तम स्वर्णकार व डॉ. मृदुल दांतरे ने संयुक्त रूप से किया।
इस दौरान मूर्खाधिराज ब्रजेन्द्र मयंक ने इस परम्परा को कोंच की विरासत बताते हुये कहा कि होली जैसे अन्य पर्वों पर भी लोगों को आपसी बैमनस्यता त्याग कर एक दूसरे की मदद करते हुये प्रसन्नतापूर्वक अपना जीवन व्यतीत करना चाहिये और अपने अंदर की बुराइयों को जला कर एक नये युग का सूत्रपात करने के लिये दृढप्रतिज्ञ रहना चाहिये। उन्होंने कहा कि खुद प्रसन्न रहने और दूसरों को प्रसन्न करने की कला जिसने सीख ली वही पर्वों के सही महत्व को जान सकता है और दूसरों को भी बता सकता है। सांसद भानुप्रताप वर्मा, विधायक द्वय मूलचंद्र निरंजन, गौरीशंकर वर्मा, सीडीओ एसपी सिंह, एएसपी सुभाषचंद्र शाक्य, एसडीएम मोईन उल इस्लाम, सीओ नवीनकुमार नायक, कोतवाल देवेन्द्र द्विवेदी ने कहा कि होली का त्योहार रंगों और उमंगों का त्यौहार होने के नाते लोग अपने पुराने गिले शिकवों को भुला कर एक नये युग की शुरूआत करें और ऐसा समाज बनायें जिसमें सभी एक दूसरे की चिंता करते हों। इस तरह के आयोजन सामाजिक एकता और समरसता के संवाहक होते हैं जिन्हें निरंतर गतिमान रहना चाहिये। बाकई इस आयोजन को देख कर ऐसा लगा कि उन तथाकथित बुद्धिजीवियों जो समाज को बांटने में अपनी काबिलियत समझते हैं, से यह मूर्खों की जमात सौ गुनी अच्छी है जो कम से कम हिल मिल कर रहने का संदेश देकर अमन और समरसता को बढावा देने का काम करती है।
स्वागत सत्कार जैसी बेवकूफियों से निपटने के बाद जब हंसाने और गुदगुदाने का दौर शुरू हुआ तो वहां जमे हजारों मूर्ख घंटों ठऋा करते रहे और खीसें निपोरते रहे। हास्य और प्रहसन के दौर में जहां मूर्खाधिराज से जुड़े अतीत को कुरेद कर उनकी पोलें खोली गई, वहीं मंच पर विराजे अन्य छोटे बड़े मूर्खों को लेकर भी गजब की व्यंग्यिकायें परोस कर माहौल को खुशगवार बनाये रखने का पीठ ठौंकू प्रयास किया गया। महिला व अन्य पात्रों में अतुल शर्मा, अभिषेक रिछारिया, गौरीशंकर झा, ऋतिक याज्ञिक, कृष्णा सोनी, कृष्णकांत वाजपेयी, सूर्यदीप सोनी, वीरेन्द्र त्रिपाठी आदि ने अपने चरित्रों में जमकर जान फूंकी। शिक्षक कमलेश निरंजन, कवि ओंकारनाथ पाठक, दिनेश मानव, नंदराम स्वर्णकार, विजय रावत ने व्यंग्य बांचे। इस दौरान भाजपा नगर अध्यक्ष प्रदीप गुप्ता, वीरेन्द्र बहरे, राजीव पटेल, शैलेष सोनी, किशोर यादव, सांसद प्रतिनिधि अनिरुद्ध मिश्रा, मदर्स प्राइड के संरक्षक विनोद पांडे, अमित यादव, विशाल गिरवासिया, कन्हैया नीखर, शिवशंकर त्रिपाठी, देशराज जादौन, मंजू नगाइच, आशुतोष हूंका, प्रमोद शुक्ला, अमित सोनी, धर्मेन्द्र राठौर, ब्रजेन्द्र कुशवाहा, डॉ. जगतसिंह यादव, मनोज तिवारी, अखिलेश बबेले, अमित उपाध्याय, अनिल अग्रवाल, कोतवाली के दरोगा जयवीर सिंह सहित तमाम अच्छे भले मूरख वहां मौजूद रहे।
इंसेट में-
बड़ी मशक्कत से होती है मूर्खाधिराज की खोज
होली के मौके पर हर साल पड़वा के दिन लोगों को गुदगुदाने के लिये महामूर्ख सम्मेलन का आयोजन पिछले कई दशकों से होता आ रहा है, इस आयोजन की बागडोर संभाली थी बुंदेली संस्कृति एवं लोक कला संबर्द्धन संस्थान नामक संस्था ने। आयोजन से लगभग पखवाड़े भर पहले से संस्था से जुड़े लोग महामूर्ख का चयन करने के लिये बाकायदा अन्बेषण करते हैं और ऐसे व्यक्ति को इस पद पर प्रतिष्ठित करते हैं जो समाज में चर्चित चेहरा हो। काफी खोज के बाद संस्था को अबकी दफा लोकतंत्र सेनानी ब्रजेन्द्र मयंक आखिरकार मूर्खाधिराज जैसे पद पर प्रतिष्ठित करने के लिये मिल ही गये। ठीक डेढ बजे उनकी बारात गाजे-बाजे के साथ बजरिया सब्जी मंछी से निकल कर केलरगंज में सम्मेलन स्थल तक पहुंची। महामूर्ख बग्घी पर सवार थे और बाराती नाचते गाते चल रहे थे। रास्ते में कई जगह बारात का स्वागत किया गया।

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