उरई। रेल मंत्रालय के अन्तर्गत 15 सूत्रीय मांग करने के बाद लोक सभा में अपनी ताबड़तोड़ परफाॅर्मेंस जारी रखते हुए स्थानीय सांसद भानु प्रताप सिंह वर्मा ने दूसरे दिन लोकसभा में आम बजट के अन्तर्गत 2017-18 के तहत कृषि मंत्रालय की अनुपूरक मांगों पर भारतीय जनता पार्टी की ओर से बोलते हुए कहा कि भारत एक कृषि प्रधान देश है और मैं बुन्देलखंड क्षेत्र के जालौन गरौठा भोगनीपुर संसदीय क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करता हूं। जहां का मुख्य व्यवसाय कृषि है और मेरे संसदीय क्षेत्र की ज्यादातर जनता कृषि आधारित कार्यों से जुड़ी हुई है। ऐसे में मेरी प्राथमिकता बनती है कि इस देश और अपनी जनता के प्रतिनिधि के रुप में कृषि विकास के जो रास्ते प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केन्द्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने खोले है, उसकी देहरी पर सुखद भविष्य के स्वागत में एक दीपक मैं भी जलाउं। सांसद ने कहा कि चाहे वह फसल बीमा योजना हो या नीम कोटेड खाद। हमारी सरकार ने कृषि विकास के बुिनयादी विकास का द्वार खोला है जो आॅर्गेनिक खेती और अच्छे उत्पादन से इस देश के अन्नदाता को सुखी व समृद्ध करने का काम करेगा। जैसा कि आप जानते है कि हमारे बुन्देलखंड किसानों की हालत उतनी समृद्ध नहीं है, जितनी पहली थी। असमय बारिश/ओला वृष्टि और सूखे का कारण किसानों की स्थिति बहुत दयनीय हो चली है। जिसके कारण पलायन जैसी समस्या से लोगों को रुबरु होना पड़ रहा है।
इसके पश्चात अपनी मांग रखते हुए भानु वर्मा ने बड़े सधे तरीके पार्टी का मान और जनता का सम्मान एक साथ रखा उन्होंने पहली ही मांग में बुन्देलखंड के किसानों की वर्तमान आर्थिक समाजिक स्थिति, समस्याओं को समझने के लिये एक रिटार्यड जज की अध्यक्षता में केन्द्रीय कमीशन गठन करने की मांग की जो पिछले कुछ वर्षों से दैवीय आपदा झेल रहे कृषकों विस्तृत जांच कर एक वर्ष के भीतर केन्द्र सरकार के समक्ष प्रस्तुत करे। बाद में इस कमीशन की सिफारिशें मानकर सरकार बुन्देलखंड के किसानों की समस्या का स्थायी इलाज कर सके। अपनी दूसरी मांग में भानु वर्मा ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की जमकर तारीफ करते हुए कहा कि माननीय प्रधानमंत्री जी ने फसल बीमा योजना का जो विजन कृषकों के लिये खोजा है, वह एक जनहितैषी निर्णय साबित होगा। मेरी मांग है कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अन्तर्गत क्लेम की धनराशि को फसल के न्यूनतम समर्थन मूल्य के बराबर किया जाना चाहिए। ताकि यदि दैवीय आपदाओं से किसान को हानि पहुंचती है, तो उसकी भरपाई फसल बीमा योजना द्वारा की जा सके। इसके साथ विगत माह में ओला वृष्टि में हुई फसल बर्बादी के नुकसान की भरपाई के लिये किसानों को मुआवजा प्रदान करने की वकालत की। इसके अलावा पार्टी का पक्ष रखते भाजपा के घोषणा पत्र की बात रखते हुए उत्तर प्रदेश के किसानों के ऋण माफी की बात भी कही। इसके अलावा हाल ही में जनपद में चर्चित रहे उरड़ के बीज प्रजाति आजाद-3 की बीमार फसल से प्रभावित किसानों को भी अतिरिक्त नुकसान की भी भरपाई के साथ तत्कालीन उत्तर प्रदेश बीज भंडार निगम के द्वारा खराब बीज की प्रदेश स्तरीय जांच कराने की भी मांग कर डाली। इसके बाद कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह को उनकी झांसी यात्रा का हवाला देते हुए केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झांसी का एक विभाग गरौठा तहसील में और माधौगढ़ तहसील में कृषि महाविद्यालय खोलने की भी मांग की। इसके बाद पुनः अपने क्षेत्रीय किसानों की समस्या पर महत्वपूर्ण मांग करते हुए कहा कि किसानों को मृदा परीक्षण केन्द्रों की संख्या एवं कर्मचारियों की कमी होने के कारण यहां किसानों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, मेरी मांग है कि मेरे संसदीय क्षेत्र में मृदा परीक्षण केन्द्रों को विकासखंड स्तर पर खोला जाये तथा तहसील स्तर पर मृदा परीक्षण प्रयोगशालायें स्थापित की जायें। इसके अतिरिक्त सुदूरवर्ती ग्रामों में पहुंच बढ़ाने के लिये और किसानों को मृदा परीक्षण के लिये प्रोत्साहित करने के लिये एक मोबाइल मृदा परीक्षण वैन की भी व्यवस्था की जाये। आखिर में भूमिहीन किसानों के पलायन पर चिंता जताते हुए डेयरी विकास क्षेत्र के अन्तर्गत पूरे देश में एक सर्वे कराने की मांग करते हुए कहा कि कृषि अयोग्य भूमि को चिन्हित करके पशुपालन क्षेत्र में लागाया जाये और इस भूमि को आर्थिक सामाजिक आधार पर भूमिहीन किसानों को लीज पर दिया जाने का प्रबंध किया जाये।
जानकारों का मानना है भाजपा के वरिष्ठ सांसद होने के कारण भानु वर्मा को लोकसभा में पार्टी द्वारा जो समय दिया गया उसका उन्होंने भरपूर प्रयोग करके कृषक कल्याण की आधारभूत मांगे सरकार के सामने रखी है, जो किसानों को लंबे समय तक लाभ पहुंचाती रहेंगी।

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