लखनऊ। बिहार में जंगल राज समाप्त करने का असली श्रेय यूपी पुलिस को रहा जबकि यह बात बहुत कम लोगों को मालूम है। अब जबकि यूपी में भाजपा की सरकार गठित हो गई है तो पार्टी के जानकार लोगों को नये डीजीपी की तलाश के क्रम में सन् 2000 में बिहार के कुख्यात माफिया शहाबुददीन के खिलाफ यूपी पुलिस द्वारा किया गया ऐतिहासिक दिलेरी का सबूत देने वाला आॅपरेशन अनायास याद हो उठा है।
सन् 2000 में शहाबुददीन का आतंक चरम सीमा पर था। उसकी कारगुजारियां केवल बिहार तक सीमित नही थीं। बिहार से लगे उत्तर प्रदेश के गोरखपुर रेंज के जिले भी उसके आतंकी कारनामों से कराह रहे थे। उस समय गोरखपुर रेंज की कमान बतौर डीआईजी सूर्यकुमार शुक्ला के हाथ में थी। पानी सिर से ऊपर होने पर सूर्य कुमार ने शहाबुददीन के खिलाफ उसकी मांद में घुसकर सीधा आॅपरेशन करने का प्लान बनाया।
इसके तहत उन्होंने चुनिंदा पुलिस अधिकारियों और जवानों की टीम लेकर दिन दहाड़े सीवान में शहाबुददीन के घर धावा बोल दिया। शहाबुददीन को उम्मीद नही थी कि बिहार या यूपी की पुलिस उसकी मांद में आकर उसे ललकारने का दुस्साहस कर सकती है। इसलिए वह बौखला गया और उसके गुर्गां ने यूपी पुलिस पर युद्ध छेड़ने के अंदाज में फायरिंग शुरू कर दी। इसके बावजूद यूपी पुलिस मोर्चे से नही हटी। स्वयं डीआईजी के बतौर सूर्य कुमार शुक्ला ने जबावी फायरिंग की अगुवाई की। सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक चले इस रियल एनकाउंटर में यूपी पुलिस ने शहाबुददीन के छक्के छुड़ा दिये। जबकि शहाबुददीन के गुर्गे अत्याधुनिक हथियारों से लैस थे। शाम 4 बजे जब फायरिंग बंद कर शहाबुददीन के गुर्गे भाग निकले तो यूपी पुलिस ने उसके ठिकाने की तलाशी ली जहां 10 दुर्दांत अपराधियों की लाशें मिली। यह एक ऐसा विरल एनकाउंटर था जिसमें पुलिस के पक्ष का एक आदमी घायल नही हुआ था।
भाजपा के इन नेताओं का कहना है कि यूपी में भय मुक्त समाज के निर्माण और अपराधियों के सफाये के लिए ऐसी ही जाबांजी की जरूरत पुलिस से है। इसलिए उन्होंने सीएम योगी आदित्यनाथ के दरबार में सबसे मजबूती से नये डीजीपी के लिए सूर्य कुमार का नाम रखा है। लेकिन शायद नौकरशाही में एक मुश्त बदलाव का प्लान योगी बनाये हुए हैं। जिसकी वजह से अकेले चीफ सेकेट्री और डीजीपी को बदलने का कोई कदम उन्होंने सरकार के गठन को 24 घंटे का समय बीत जाने के बावजूद न उठाकर अटकलबाजों को चकरघिन्नी बना दिया है।

Leave a comment