उरई। प्रदेश के विधासभा चुनाव के नतीजे आए आधा माह से ज्यादा समय हो गया है और नई सरकार के गठन को भी दस दिन से अधिक बीत चुके हैं। इन दस दिनों में प्रदेश के नए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से लेकर उनका मंत्रीमंडल व तमाम विधायक अपनी तेजतर्रार कार्यशैली को लेकर लगातार सुर्खियां बटोर रहे हैं और आम जनमानस के बीच सरकार की अच्छी छवि बनाने में जुटे हैं पर जिले के भाजपा विधायकों की भी जीत की ही खुमारी नहीं उतर पाई है। चुनाव परिणाम आने से लेकर अब तक वह केवल अपना स्वागत कराने और भाषणबाजी में ही व्यस्त हैं जबकि जिले की गंभीर समस्याओं को लेकर अब तक उनके द्वारा कोई गंभीरता नहीं दिखाई गई है। इसे लेकर जिले के लोगों में निराशा फैल रही है। जिले के चौमुखी विकास व वर्षों पुरानी गंभीर समस्याओं के समाधान के लिए जिले की जनता लगातार भारतीय जनता पार्टी पर भरोसा जता रही है। लोकसभा चुनाव से लेकर विधानसभा चुनाव तक में जिले की जनता ने बीजेपी पर भरोसा जताते हुए बीजेपी के प्रत्याशियों को ऐतिहासिक जीत दिलाई है। लेकिन इसके बाद भी जिले के लोगों की समस्याएं खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं। कारण यह है कि लोकसभा चुनाव में विजय हुए सांसद भानु प्रताप वर्मा अपनी निष्क्रियता को लेकर लगातार चर्चा में रहते हैं। इसके बाद जनता ने विधानसभा चुनावों में फिर से बीजेपी उम्मीदवारों पर भरोसा जताया और जिले की तीनों विधानसभा सीटों से बीजेपी को ऐतिहासिक जीत दिलाई पर उनका यह भरोसा इस बार भी टूटता हुआ नजर आ रहा है। प्रदेश में नई सरकार के गठन को दस दिन से अधिक समय हो गया है। प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ द्वारा लगातार ताबड़तोड़ फैसले लेकर जनता में सरकार की छवि को अच्छा बनाने का प्रयास किया जा रहा है। इस काम में उनके मंत्रियों से लेकर बड़ी संख्या में विधायक भी मदद कर रहे हैं पर जिले के विधायक हैं कि उनमें इसकी बिल्कुल भी परवाह नजर नहीं आ रही। अभी इन विधायक जी की जीत की खुमारी ही नहीं उतरी है। यही कारण है कि अभी तक जीते हुए विधायक सिर्फ स्वागत व वायदे करने में लगे हैं जबकि जिले की किसी भी गंभीर समस्या को लेकर कोई गंभीरता नहीं दिखाई है। जिले में बिजली, सड़क, पानी जैसी मूलभूत समस्याओं से लोगों को दो-चार होना पड रहा है। इसके अलावा सरकारी विभागो में फैला भ्रष्टाचार भी बदस्तूर जारी है। लोगों को पहले की तरह ही अभी भी हर काम में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बीजेपी के विधायकों द्वारा इन समस्याओं को लेकर गंभीरता न दिखाए जाने से जनमानस में निराशा फैल रही है। अब देखना यह है कि आने वाले समय में जिले के जनप्रतिनिधि इसे लेकर क्या रुख अपनाते हैं और किस हद तक लोगों को राहत दिलाने का काम करते हैं?





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