0 पांच साल तक जिले में अवैध खनन कारोबार में रहा सबसे टाप पर
0 जिले के सबसे बड़े अधिकारियों का भी स्थानांतरण कराने की रखता था ताकत
उरई। प्रदेश में हवा का सपा शासनकाल में जिस खनन माफिया की बोलती थी तूती, अब हुआ लापता!रुख बदलते ही जिले के अवैध कारोबारी भी हाल-फिलहाल कुछ समय के  लिए लापता हो गए हैं। ऐसा ही एक अवैध खनन का बडा कारोबारी इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। कुछ समय पहले तक इस  खनन कारोबारी की बड़ी तूती बोलती थी और जिले के बड़े अधिकारियों तक का स्थानांतरण कराने का दंभ भरता था पर इन दिनों इस माफिया का कोई अतापता नहीं है। इस खनन माफियाओं को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं इन दिनों जिले में हो रही हैं। अवैध खनन के कारोबार पर तलवार लटकने के बाद इस खनन माफिया के भी गर्दिश के दिन शुरू हो गए। यह मांग की जा रही है कि इस खनन माफिया की जांच कराई जाए। इसे समय का फेर ही कहेंगे, कि कुछ दिनों तक जिस खनन माफिया की तूती बोलती थी आज वह खुद ही लापता है। यह खनन माफिया इन दिनों जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। इस खनन माफिया का नाम बसपा शासनकाल से ही सामने आना शुरू हो गया था पर उस समय पोंटी चड्डा का सिंडीकेट होने के कारण यह खनन माफिया ज्यादा पनप नहीं पाया। प्रदेश में सत्ता परिर्वतन हुआ और वर्ष 2012 में जब समाजवादी पार्टी सरकार में आई तो इस खनन माफिया के दिन भी फिर गए। पांच साल तक इस खनन माफिया का कारोबार भी दिन दूना रात चौगुना बढता गया। सेटिंग-गेटिंग के खेल में माहिर इस खनन माफिया का लखनऊ की गद्दी तक असर बढ़ा। कुछ बाद एक समय ऐसा भी आया कि यह खनन माफिया जिले के बड़े अधिकारियों का स्थानांतरण कराने का दंभ भी भरने लगा। चर्चा तो यहां तक रही कि सपा शासनकाल में हुए कुछ जिलाधिकारियों के स्थानांतरण में भी इस खनन माफिया का हाथ रहा पर इस बात में कितनी सत्यता है यह कभी साफ  नहीं हो पाया पर इतना तो तय है कि जिले में इस खनन माफिया के आगे कोई भी सिर नहीं उठा पाया जिसने भी खनन किया उसे इसी माफिया के संरक्षण में  करना पड़ा। अब प्रदेश में एक बार फिर से सत्ता परिर्वतन हो गया है। इसके साथ ही इस खनन  माफिया के बुरे दिन भी शुरू  हो गए हैं। नई सरकार द्वारा अवैध खनन पर अंकुश लगाया गया है। इसे  लेकर इस खनन माफिया का कारेाबार भी ठप हो गया है। मजे की बात तो यह है कि इस माफिया का इस समय कोई अतापता भी नहीं चल रहा है। सूत्रों की मानें तो खुद भारतीय जनता पार्टी के कुछ जनप्रतिनिधि व नेता इस खनन माफिया से व्यक्तिगत रूप से काफी नाराज हैं और आने वाले समय में इस  खनन माफिया की उच्च स्तरीय जांच का प्रयास भी कर रहे हैं। अब देखना यह है कि सेटिंग-गेटिंग के खेल में माहिर यह खनन माफिया बीजेपी नेताओं व जनप्रतिनिधियों को खुश करने में सफल रहता है या फिर उसे जांच का सामना करना पड़ेगा?

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