लखनऊ। बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर केन्द्रीय विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग द्वारा गत दिनों पर्यावरण विज्ञान विद्यापीठ सभागार में ‘’इक्कीसवीं सदी में हिंदी पत्रकारिता के समक्ष चुनौतियाँ: भाषा एवं साहित्य का द्वन्द’’ विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
संगोष्ठी के उदघाटन सत्र में पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर एवं हिंदी विभाग की समन्वयक डॉ शिल्पी वर्मा के स्वागत वक्तव्य के बाद सत्र की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो० आर० सी० सोबती ने कहा कि भारत ही विश्व की सभ्यता का मूल देश है। भारतीय भाषा व साहित्य ही हमारी प्रगति का मुख्य आधार है। अतः हमें अपनी भाषा को पहचानना चाहिए और उस पर गर्व करना चाहिए। संगोष्ठी का विषय प्रवर्तन करते हुए अंबेडकर अध्ययन विद्यापीठ के संकायाध्यक्ष, अधिष्ठाता छात्र कल्याण एवं राजनीति विज्ञान के विभागाध्यक्ष प्रो० रिपु सूदन सिंह ने पत्रकारिता की समकालीन चुनौतियों पर प्रकाश डाला।
इसके उपरान्त जामिया मिलिया इस्लामिया के हिंदी विभाग के प्रो० दुर्गा प्रसाद गुप्त ने मुख्य वक्ता के रूप में विचार व्यक्त करते हुए कहा कि साहित्य की अपनी कुछ नैतिकताएँ व मान्यताएं होती हैं जो कि पत्रकारिता से बिलकुल इतर हैं। इस द्वन्द को समाप्त करने के लिए यह जरूरी है कि पत्रकारिता भी साहित्य की नैतिकताओं को अपने भीतर समायोजित करने का प्रयास करे।
संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय के नोयडा परिसर से आये प्रो० बी० एस० निगम ने भाषा, साहित्य और पत्रकारिता के बीच के द्वंद और उसकी चुनौतियों पर अपने विचार रखे।
इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के पूर्व उच्च शिक्षा निदेशक डॉ बी० एन० शुक्ल, बनारस हिदू विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग की प्रो० श्रद्धा सिंह, लखनऊ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यक्ष डॉ मुकुल श्रीवास्तव आदि ने भी महत्त्वपूर्ण विचार रखे।
संगोष्ठी के द्वितीय सत्र में महत्त्वपूर्ण व चयनित शोध पत्रों का वाचन किया गया। इस संगोष्ठी के लिए 45 प्रतिभागियों नें शोध-सार जमा कर अपना पंजीकरण कराया जिनमें से 17 ने अपना शोध पत्र प्रस्तुत किया। इन शोध पत्रों में इक्कीसवीं सदी में पत्रकारिता की चुनौतियों और उसके बदलते स्वरूप पर तो प्रकाश डाला ही गया साथ ही भाषा और साहित्यिक स्तर पर पत्रकारिता के विविध आयामों की पड़ताल भी की गयी।
समापन सत्र की अध्यक्षता लखनऊ विश्वविद्यालय के हिंदी तथा आधुनिक भारतीय भाषा विभाग के पूर्व प्रोफेसर हरिशंकर मिश्र नें की। उनके साथ सत्र की सह अध्यक्षता महाराज बिजली पासी राजकीय पी० जी० कॉलेज लखनऊ के हिंदी विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ भारती सिंह ने की।
इस सत्र में झांसी टाइम्स के सम्पादक के० पी० सिंह नें स्थानीय पत्रकारिता के अपने अनुभवों को साझा किया। साथ ही हिन्दी पत्रकारिता में हिंग्लिश के प्रयोग को हिंदी के अस्तित्व के खिलाफ षणयंत्र बताते हुए कहा कि हिंदी में स्फूर्ति और सौंदर्यबोध की कोई कमी नही है बशर्ते उसे आम पाठकों की भाषा तक सीमित रखने के नाम पर दायरे में बांधकर न रखा जाये। उन्होंने हिंदी के प्रति निष्ठावान पत्रकारों से हिंदी की शक्ति और क्षमता के पूरे इस्तेमाल का आवाहन किया तांकि हिंदी की पत्रकारिता सही अर्थों में ताकतवर हो सके।
संगोष्ठी के समापन में रिपोर्ट पढ़ने का कार्य हिंदी विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ अल्पना सिंह ने किया। धन्यवाद ज्ञापन का कार्य हिंदी विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ शिप्रा किरण एवं अंशिता शुक्ल द्वारा किया गया। संचालन हिंदी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ शिव शंकर यादव ने किया। डॉ सर्वेश कुमार ने उनका सहयोग किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के विविध विभाग के विभागाध्यक्ष, संकायाध्यक्ष भी उपस्थित रहे।





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