उरई(जालौन)। शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009 की धारा 12(1)(सी) के तहत निजी गैर सहायता प्राप्त स्कूलों में एससी, एसटी ओबीसी, विकलांग, अनाथ, एलजीबीटी एवं आर्थिक रूप से कमजोर बच्चे 6 से 14 वर्ष में कुल सीटों के लिए शुरूआती क्लास आरक्षण व निजी स्कूलों में बच्चों के प्रवेश हेतु संस्था ग्रामीण जीवन विकास प्रशिक्षण एवं शोध संस्थान व प्रयास जन उत्थान समिति एवं बुंदेलखंड दलित अधिकार मंच द्वारा लोगों के बीच चरसोनी, बाबई में एक जागरूकता कैंप किया गया जिसमें गांव के लोगों को शिक्षा अधिकार कानून के प्रति जागरूक किया गया व स्टाल लगाकर लोगों को समझाया गया कि अब निर्धन वर्ग के बच्चे भी प्राईवेट कालेज में निःशुल्क प्रवेश ले सकते है।
जागरूकता कैंप में ग्रामीण जीवन विकास प्रशिक्षण एवं शोध संस्थान से मनोज कुमार व अनीता राज ने गांव के लोगों को बताया कि हम सबको अपने बच्चों को खासकर लड़कियों की शिक्षा के प्रति विशेष ध्यान देना होगा यही हमारे भविष्य है। जो कि आगे चलकर इस देश को आगे ले जाने का कार्य करेगी। उन्होंने कहा कि हमारे बीच शिक्षा अधिकार कानून है जो कि सभी बच्चो को पढ़ने के लिए अवसर प्रदान कर रहा है हम लोग नजदीकी प्राइवेट कालेज में भी अपने बच्चों को निःशुल्क शिक्षा ग्रहण करा सकते है। सामाजिक कार्यकर्ता रिहाना मंसूरी एवं संजय ने लोगों को शिक्षा अधिकार कानून में 25 प्रतिशत सीटांे पर कमजोर वर्ग के बच्चों के प्रवेश कराने हेतु आवश्यक दिशा निर्देशों का पर्चा देकर लोगों को जागरुक किया। प्रयास जन उत्थान समिति से सुरजीत व बुंदेलखंड दलित अधिकार मंच के संयोजक कुलदीप कुमार बौद्ध ने शिक्षा अधिकार कानून पर लोगों को विस्तृत जानकारीदी। उन्होंने बताया कि इस कानून में 6 से 14 वर्ष के सभी बच्चों को निःशुल्क शिक्षा देने का प्रावधान है इसी के तहत इस कामों की धारा 12(1)(सी) का प्रावधान किया गया है कि प्राइवेट स्कूलों में कमजोर वर्ग के 25 प्रतिशत बच्चों के निःशुल्क प्रवेश के लिए प्रावधानित करता है। उन्होने कहा कि इसका फायदा लेते हुए अपने बच्चों को प्राईवेट कालेजों में अब निशुल्क शिक्षा ग्रहण करा सकते है। आज के कार्यक्रम में रामनारायण, मोहर सिंह, कप्तान सिंह,दीपक, सेवाराम, जितेन्द्र, मनीष,संध्या, नीतू, पिं्रसी, ममता, सहित सैकड़ों लोगों महिला एवं पुरूषों व बच्चों ने सहभागिता की। शिविर में जिला प्रशासन का ध्यान इस ओर आकृष्ट करते हुए समाजसेवी संस्थाओं ने मांग की है कि निजी स्कूलों में शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत 25 प्रतिशत गरीब बच्चों को दाखिला दिलाया जाए। जिससे गरीब बच्चों को भी अच्छी शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिल सके।
फोटो परिचय- शिविर में बच्चों को जागरुक करते समाज सेवी

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