0 सफेद हाथी बना नगर का प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र
0 सरकारी धन के अपव्यय के अलावा कोई लाभ नहीं है इसका
कोंच-उरई। सरकारें जनता की सुविधा के लिये लाखों खर्च करके अस्पताल और संसाधन मुहैया कराती हैं लेकिन देखरेख की कमी के कारण जनता को इनका लाभ कतई नहीं मिल पाता। कोंच कस्बे के मोहल्ला गोखले नगर स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र इलाके के मरीजों को स्वास्थ्य लाभ देने के लिये प्राइवेट बिल्डिंग में तकरीबन छह साल पहले स्थापित कराया गया था लेकिन अव्वल तो इसके बारे में लोगों को जानकारी ही नहीं है और दूसरे जिन इलाकाई बाशिंदों को इसके बारे में जानकारी है भी तो उन्हें इसका लाभ बिल्कुल नहीं मिल पाता है, कारण इसमें तैनात डॉक्टर ही कभी कभार आकर खानापूरी कर चले जाते हैं।
हालांकि कोंच में सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र कई बीघे में पसरा है लेकिन कस्बे की आबादी से लगभग एक से दो किमी दूर होने के कारण सभी मरीज वहां तक नहीं पहुंच पाते हैं। इस दिक्कत को देखते हुये पिछली सपा सरकार में कस्बे के बीचों बीच एक प्राइवेट बिल्डिंग किराये पर लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र की स्थापना कराई गई थी। कहने को तो यहां डॉक्टर सहित अन्य स्टाफ लिखापढी में मौजूद है लेकिन ड्यूटी करने कोई नहीं आता। दवाओं का यहां भारी टोटा है, मरीज आते तो हैं लेकिन डॉक्टर नहीं मिलने के कारण बैरंग लौटने को मजबूर हो जाते हैं। शनिवार को अस्पताल का जायजा लेने पहुंचे संवाददाता को वहां गजब की सूनर पसरी मिली। डॉक्टर की कुर्सी खाली पड़ी थी, स्टाफ के लोग जरूर वहां मौजूद थे। जानकारी करने पर वहां इलाके के लोगों ने बताया कि यहां डॉ. सीएस कंचन की तैनाती है जो झांसी में रहते हैं और सप्ताह में एकाध दिन आकर पूरे सप्ताह की हाजिरी लगा जाते हैं। अस्पताल अन्य स्टाफ के भरोसे ही चलता है। महिला डॉक्टर यहां है नहीं, अलबत्ता स्टाफ में फार्मासिस्ट रामपाल, एलटी पुरुषोत्तम मिश्रा, स्टाफ नर्स छायादेवी, रचना गौतम, एएनएम गीता पटेल, मांडवी, पूनम लाक्षकार, प्रतिमा पटेल, साधना मिश्रा, वार्ड व्वाय अरविंद यादव और स्वीपर कम चैकीदार विजयकुमार की तैनाती जरूर है। सरकार के लाखों खर्चने के बाद भी अगर लोगों को स्वास्थ्य सुविधा का लाभ नहीं मिल रहा है तो ऐसे स्वास्थ्य केन्द्र को चलाने का फायदा क्या है। यहां एक सबसे बड़ी दिक्कत रास्ते की भी है, संकरे रास्ते और गलियों की वजह से वहां तक वाहन भी नहीं पहुंच पाते हैं। इस स्वास्थ्य केन्द्र में बिजली और पानी की भी कोई व्यवस्था नहीं है।
डॉक्टर न मिलने से बैरंग लौटी मीरा
गोखले नगर स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र के बाहर एक अधेड़ महिला बैठी मिली जो काफी परेशान सी दिख रही थी। पूछने पर उसने अपना नाम मीरादेवी (55) पत्नी रमेश निवासी गांधीनगर बताया। उसकी परेशानी यह थी कि उसकी आंखों में कई दिन से खुजली की शिकायत थी और लगातार आंसू आ रहे थे। आज वह अस्पताल में दिखाने आई थी लेकिन डॉक्टर नहीं मिलने के कारण उसे बैरंग लौटना पड़ रहा था।
फोटो-इलाज कराने आई मरीज मीरादेवी
सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में सिर्फ 4 डॉक्टर
कई बीघे में विस्तार पा रहे सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में मानक के अनुसार 11 डॉक्टरों की तैनाती होनी चाहिये लेकिन यहां केवल 4 डॉक्टरों से ही किसी तरह काम चलाया जा रहा है। स्वास्थ्य केन्द्र प्रभारी डॉ. आरके शुक्ला के अनुसार यहां पांच चिकित्सकों की तैनाती थी लेकिन इनमें से भी एक का स्थानांतरण कर दिया गया है। डॉक्टरों की कमी यहां बर्ष 1996 से ही बनी हुई है जिसे आज तक दूर नहीं किया जा सका है। स्वास्थ्य केन्द्र में एक भी बिशेषज्ञ डॉक्टर नहीं है और न ही कोई सर्जन है। जुलाई 2016 से एक्स-रे मशीन शो पीस बनी है क्योंकि ऑपरेटर जेल में है।
फोटो-डॉ. आरके शुक्ला





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