उरई । शिक्षकों के तबादलों को ले कर प्रशासन को आखिर बैकफुट पर आना पड़ा । मनमाने ढंग से जारी की गई तबादला सूची में बड़े पैमाने पर रिश्वत वसूली सहित सभी आरोपों की जाँच के लिए डी एम ने उच्च स्तरीय समिति गठित करने के आदेश जारी कर दिये हें ।

शासनादेश के मुताबिक  बेसिक शिक्षा  के लिए गठित  समायोजन और स्थानांतरण समिति ने जनवरी के महीने में 85 शिक्षकों के नामों की सूची तैयार की थी जिन्हे जिलाधिकारी संदीप कौर ने भी 3 जनवरी को अपना अनुमोदन प्रदान कर दिया था । लेकिन यह सूची जारी होते ही इसके पहले विधान सभा चुनाव की आचार संहिता प्रभावी हो गई जिससे सूची का क्रियान्वयन न हो सका ।

इसी बीच नई सरकार के गठन की आपाधापी के बीच यकायक शिक्षकों के तबादलों और समायोजन की जो सूची जारी हुई उससे लोग भौंचक रह गये । इस सूची में दुस्साहस की पराकाष्ठा थी । शासनादेश में तय किए गये सारे मानक दरकिनार कर तैयार की गई इस सूची के चलते कई विद्यालय शिक्षक विहीन कर दिये गये फिर भी अधिकारी इस अनियमितता को संज्ञान में लेने के लिए तैयार नहीं थे । सभी नव निर्वाचित विधायकों ने भी आपत्ति की लेकिन तो प्रशासन तास से मास होता न दिखा ।

यह मुद्दा योगी सरकार के जालौन जिले के जन मानस के बीच लिटमस के रूप में देखा जा रहा था । क्या इस सरकार में भी चीजें मैनेज करने की परंपरा बरकरार रहेगी यह सवाल जन मानस में छाया हुआ था लेकिन आखिर

संदेहों की धुंध छटी जब डी एम ने उक्त सारे आरोपों  का हवाला देते हुए गलत तबादलों का पूरा ठीकरा पटल सहायक पर फोड़ दिया और ए डी एम आर के सिंह व उप जिलाधिकारी सदर अक्षय त्रिपाठी की समिति बेसिक शिक्षा में हुए तबादलों की जाँच के लिए गठित करने की घोषणा कर दी । इस समिति से अपनी जाँच रिपोर्ट अधिकतम एक सप्ताह के अंदर सौंपने का निर्देश दिया गया है । इस आदेश के चलते न केवल अधिकारियों बल्कि सियासी हल्के में भी खलबली मची हुई है ।

 

 

Leave a comment

Recent posts