
उरई । अपने बच्चों को अच्छे से अच्छे स्कूल में शिक्षा दिला कर उन्हे होनहार बनाने का सपना हर कोई देखता है । यह सपना हकीकत में उन्ही लोगों के बदल पाते हैं जो आर्थिक रूप से सम्पन्न होते हैं । गरीबों के लिए अच्छे स्कूल में दाखिला कराना मुमकिन नहीं होता और वह मायूस हो जाते हैं । उनके बच्चे भी अवसादग्रस्त हो कर गलत राह पर चल पड़ते हैं । गरीबी का दंश झेल रहे परिवारों को अब अपने बच्चों से जुड़े अरमान तोड़ने की जरूरत नहीं है । उनके सपने पूरे करने का वीनदा क्षीर सागर परिवार ने उठाया है । क्षीर सागर परिवार 100 ऐसे बच्चों को गोद ले कर अपने चार स्कूलों शीला एकेडमी इंटर कालेज माधौगढ़ , आचार्य नरेंद्र देव इंटर कालेज उरई , बी एम टी आटा और जी एन टी उरई में से उनकी सुविधा के मुताबिक किसी में उनकी पढ़ाई लिखाई कराएगा ।
आज के इस दौर में स्कूलों के दरवाजे उन अभिभावकों के लिए बंद होते हैं जिनकी ग्रहस्थी की गाड़ी मुफ़लिसी के कारण अटक – अटक कर भी मंजिल पर नहीं पहुँच पाती जबकि इनके नौनिहालों में भी कई गुदड़ी के लाल ऐसे हो सकते हैं जिन्हे बेहतर पढ़ाई का मौका मिले तो समाज की तरक्की में वे ऐसा योगदान दे जाएँ जो कभी भुलाया न जा सके । इन वन कुसुमों की खुशबू का एहसास समाज की मुख्य धारा तक पहुँचाने के लिए क्षीर सागर परिवार धर्म करे धन न घटे के भारतीय संस्कृति के चिरंतन विश्वास के साथ आगे आया है । इस परिवार ने न केवल गरीबों के लाडलों के लिए बिना फीस अपने विद्यालयों में प्रवेश के दरवाजे खोल दिये हैं बल्कि कापी , किताब से ले कर बस्ता और ड्रेस का खर्चा भी खुद उठाने का व्रत लिया है ।
पूर्व ब्लाक प्रमुख सुदामा दीक्षित और उनकी पत्नी जिला पंचायत सदस्य नम्रता दीक्षित ने बुधवार को प्रेस कान्फ्रेंस में इस पुनीत संकल्प की जानकारी देते हुए कहा कि इस सत्र से ही वे इस पर अमल शुरू कर देंगे । उन्होने कहा कि विपन्न माता पिता अपने बच्चों के के लिए कभी भी उनसे संपर्क कर सकते हैं । अगर उन्हे अपने स्तर से जानकारी मिलती है कि किसी परिवार ने फीस न भर पाने के कारण अपने बच्चों की पढ़ाई छुड़वा दी है तो वे लोग खुद जा कर उन लोगों से संपर्क करेंगे ।






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