0 गांधीनगर में समापन के साथ श्रद्घांजलि दी लोगों ने
0 तहसील प्रशासन ने गोष्ठी करके अंबेडकर दर्शन से लोगों को कराया परिचित
कोंच-उरई। युग पुरुष, संविधान रचयिता, भारत रत्न बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की 126वीं जयंती पर नगर में भव्य शोभायात्रा निकाली गई जिसने पूरे नगर का भ्रमण कर बाबा साहब के सिद्धांतों से लोगों को परिचित कराया। शोभायात्रा में बाबा साहब के चित्र यात्रा के खास आकर्षण रहे। शोभायात्रा में लोक कलाकारों ने बहुरूपियों का वेश बना कर नाना प्रकार के करतब दिखाये जो लोगों के आकर्षण का केन्द्र बने रहे। भीड़भाड़ को देखते हुये प्रशासन और पुलिस के लोग सुरक्षा में सन्नद्ध रहे। इसी के साथ तहसील प्रशासन ने भी एक गोष्ठी का आयोजन कर लोगों को संविधान के उपबंधों और बाबा साहब द्वारा शोषितों वंचितों के लिये किये गये कार्यों के बारे में बताते हुये उनके समतामूलक समाज के सिद्घांत को आत्मसात् किये जाने पर बल दिया गया। भाजपा ने दलित बस्ती में जाकर अंबेडकर जयंती को समता दिवस के रूप में मनाया।
रोडवेज बस स्टैंड के समीप स्थित बौद्ध विहार से शोभायात्रा की शुरुआत पूर्वान्ह लगभग ग्यारह बजे हुई। ढोल नगाड़ों और बैंड बाजों की धुनों पर लोग खूब नाचे। शोभायात्रा में बाबा साहब के विशाल चित्र शोभायात्रा की शोभा बढा रहे थे। सागर चैकी, चंदकुआ, स्टेट बैंक, होकर बजरिया, मालवीय नगर, आजाद नगर, भगतसिंह नगर, नई स्टेट बैंक, लवली चैराहा, नईबस्ती, रामगंज होकर का समापन यहां गांधीनगर में किया गया।शोभायात्रा में चल रहे लोगों को मिष्ठान्न खिला कर उनका मुंह मीठा कराया गया। शोभायात्रा में महिलाओं ने भी अच्छी खासी भागीदारी निभाई। आयोजन समिति डॉ. भीमराव अम्बेडकर सामाजिक समिति के अध्यक्ष ओमप्रकाश, जितेन्द्रराय अहिरवार, रवीन्द्रनाथ राम, अशोक शास्त्री, शहर काजी बशीर उद्दीन, आनंद चैधरी, राजाबाबू, शिवपालसिंह पटेल, वीरेन्द्र पत्थर, दीनदयाल बाबूजी, विश्वंभरदयाल जाटव, हल्केसिंह बघेल, श्यामकिशोर मास्टर, महेन्द्रकुमार, सुखराम, लल्लूराम, रामशंकर, परशुराम बाबूजी, विजय यादव, सियाशंकर यादव, संतोषकुमार, शौकतअली, अमित बाल्मीकि, दीपू बाल्मीकि, मौसमकुमार, रमाकांत कंथे, उदयराज, राधेश्याम, रामप्रकाश गुलेटे, रेखा जाटव, प्रियंका, नीलम, लकी, दीपा, मुन्नी, कमला, संगीताराय, गीतादेवी, ज्योति, रमाकांती, कोमल सहित सैकड़ों लोग मौजूद रहे। शोभायात्रा का समापन गांधीनगर में गोष्ठी के साथ हुआ जिसमें बाबा साहब के जीवनवृत्त पर प्रकाश डालते हुये उन्हें आज के समय में प्रासंगिक बताया गया।







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