0 सांसद-विधायक ने किया गेहूं क्रय केन्द्रों का निरीक्षण
0 कमिश्नर से एट में किसानों ने की ज्यादा मजदूरी लिये जाने की शिकायत

कोंच-उरई। सरकार द्वारा किसानों को उनकी उपज का बाजिव मूल्य दिलाने के लिये खोले गये गेहूं खरीद केन्द्रों पर हालांकि किसानों का गेहूं खरीदे जाने में दिक्कतें भले ही न आ रहीं हों लेकिन सरकार द्वारा निर्धारित दस रुपये मजदूरी के इतर केन्द्रों पर बीस पच्चीस से लेकर तीस रुपये तक मजदूरी लिये जाने की शिकायतें जरूर मिल रहीं हैं। शनिवार को सांसद और विधायक माधौगढ तथा एट में कमिश्नर के राममोहन राव द्वारा गेहूं क्रय केन्द्रों के किये गये निरीक्षण में किसानों ने इस तरह की शिकायतें की हैं। कमिश्नर ने एट में निरीक्षण के वक्त एसडीएम कोंच से इस संबंध में उठाये गये कदमों के बाबत जब जानना चाहा तो उन्होंने बताया कि इस बाबत डीएम स्तर से शासन को लिखापढी की गई थी।
इलाकाई सांसद भानुप्रताप सिंह वर्मा तथा माधौगढ विधायक मूलचंद्र निरंजन ने शनिवार को शहरी इलाके के सभी पांच गेहूं क्रय केन्द्रों सहकारी क्रय विक्रय समिति, एलएसएस जुझारपुरा, विपणन शाखा, पीसीएफ तथा यूपी एग्रो का निरीक्षण किया। जन पगतिनिधियों ने वहां सीधे किसानों से संवाद स्थापित कर उनकी कठिनाइयों के बारे में जानने की जब कोशिश की तो उन्हें बताया गया कि गेहूं की तौलाई में फिलहाल कोई दिक्कत नहीं है लेकिन सरकार द्वारा निर्धारित मजदूरी दस रुपये के बजाये उनसे बीस पच्चीस से लेकर तीस रुपये तक लिये जा रहे हैं, अलबत्ता पीसीएफ जैसे एकाध केन्द्र पर केवल दस रुपये लिये जाने की बात किसानों ने कबूली तो लेकिन यह बात न तो अधिकारियों और न ही सांसद विधायक के गले उतरी। कमोवेश सभी केन्द्रों से इस तरह की सूचनायें उन्हें भी मिली हैं कि दस रुपये मजदूरी में पल्लेदार ही नहीं मिल रहे हैं लिहाजा मजबूरी में शेष दस पंद्रह रुपये किसान से लिये जा रहे हैं। इस दौरान एसडीएम मोईन उल इस्लाम, क्रय विक्रय अध्यक्ष हरिश्चंद्र तिवारी, भाजपा नेता विनोद सिंह गुर्जर, रामलखन औदीच्य, विनोद अग्निहोत्री, सुशील दूरवार मिरकू महाराज, अनुरुद्घ मिश्रा, संतोष गिरवासिया, अमित उपाध्याय, नरेश वर्मा, अनिल अग्रवाल आदि मौजूद रहे। उधर, एट स्थित क्रय केन्द्र का निरीक्षण करने पहुंचे झांसी मंडल कमिश्नर के राममोहन राव के समक्ष भी किसानों ने ज्यादा मजदूरी वसूले जाने का रोना रोया। कमिश्नर ने मौके पर मौजूद एसडीएम कोंच मोईन उल इस्लाम से जब इस बाबत जानकारी मांगी तो उन्होंने भी कहा कि सारा मामला अधिकारियों के संज्ञान में है और डीएम के स्तर से शासन को पत्र भी लिख कर मजदूरी कम से कम बीस रुपये करने की बात कही गई थी लेकिन शासन ने फिलहाल दस रुपये ही निर्धारित की है।
मजदूरी ज्यादा मांगी जा रही है क्रय केन्द्रों पर
पीसीएफ क्रय केन्द्र पर निरीक्षण के लिये पहुंचे सांसद विधायक के सामने ग्राम धंजा निवासी किसान विनय पटेल अव्वल तो इस बात पर बिफर गया कि वह सबेरे से केन्द्र पर अपनी ट्राली लिये खड़ा है लेकिन उसका गेहूं नहीं तौला जा रहा है। जब एसडीएम ने उससे दूसरे केन्द्र पर माल तौलाने के लिये कहा तो उसने यूपी एग्रो पर तीस रुपये मजदूरी मांगे जाने की भी शिकायत की। जब सांसद विधायक और एसडीएम ने एग्रो केन्द्र पर जाकर तस्दीक की तो बताया गया कि वह दूसरों का नंबर काट कर उसकी ट्राली पहले तौले जाने की बात कही जिसे केन्द्र ने मानने से इंकार कर दिया तो वह विफर गया।
दस रुपये नाकाफी है पल्लेदारी
विपणन शाखा क्रय केन्द्र पर पल्लेदारी करने बाले महेन्द्र का कहना है कि दस रुपये मजदूरी नाकाफी है और इतने में कोई भी पल्लेदार काम करने को राजी नहीं है। उसका कहना है कि कम से कम बीस रुपये मजदूरी निर्धारित की जाये। उसने कहा कि किसान बिना छना गेहूं केन्द्रों पर लाते हैं और उसकी छनाई बनाई में काफी मशक्कत करनी पड़ती है।
सांसद विधायक ने भी माना, कम है दस रुपये मजदूरी
क्रय विक्रय समिति में सांसद भानुप्रताप वर्मा और माधौगढ विधायक मूलचंद्र निरंजन ने भी माना कि शासन द्वारा निर्धारित मजदूरी दस रुपये काफी कम है और लगभग सभी केन्द्रों पर इससे ज्यादा मजदूरी लिये जाने की बात उनके भी संज्ञान में आई है लेकिन चूंकि शासन ने यही रेट फिक्स किया है लिहाजा इससे ज्यादा ली जाने बाली मजदूरी किसानों को ही भुगतनी होगी। इस स्थिति को लेकर उन्होंने एसडीएम मोईन उल इस्लाम से इतना जरूर कहा कि सभी केन्द्रों पर एक ही रेट फिक्स कर दिया जाये ताकि किसानों का शोषण न हो सके। इसके अलावा किसी भी केन्द्र पर किसानों को किसी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिये। छुट्टी के दिन क्रय केन्द्र बंद रखने से किसानों को काफी परेशानी होती है, इसके बजाये साप्ताहिक बंदी के दिन ही इन्हें बंद रखे जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि किसानों की इस समस्या को शासन तक भेजा जायेगा। एसडीएम ने केन्द्र प्रभारियों को यह भी जता दिया है कि किसानों के रजिस्ट्रेशन के नाम पर उन्हें परेशान बिल्कुल न किया जाये, केन्द्र संचालक ही उनके रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था करे अथवा मंडी में पंजीकरण करायें।







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