0 कोंच को जोडने बाली सभी सड़कों के निर्माण कार्य रुके
0 जिला पंचायत अध्यक्ष के गांव पहुंचना भी है जोखिम भरा
कोंच-उरई। पिछले माह यूपी की सत्ता पर योगी के काबिज होने के बाद जिले की सड़कों की दशा सुधरने को लेकर लोगों में उनके बयान को लेकर काफी उम्मीद है कि 15 जून तक सभी सड़कें गड्ढा मुक्त हो जायेंगी। जिले की कमोवेश सभी सड़कों का बुरा हाल है, खासतौर पर कोंच को जिले के अन्य क्षेत्रों से जोडने बाली सभी सड़कें जिस जर्जर हालत में हैं उन्हें देख कर पिछली सपा सरकार के दावों कि काम किया है, काम करेंगे या काम बोलता है पर हंसी आती है। जेहन में यह बात बिल्कुल नहीं फिट बैठ पाती है कि इन्हीं खस्ताहाल सड़कों के भरोसे अखिलेश सरकार ने 2014 में नईदिल्ली और 2017 में लखनऊ फतह का सपना संजोया था।
कोंच को जिला मुख्यालय उरई से जोडने बाली सड़क की बात हो या एट रोड के मार्फत मंडल मुख्यालय झांसी तक पहुंचने की, सभी सड़कों की हालत इतनी खराब है कि आधे घंटे का सफर भी डेढ से दो घंटे का हो गया है। इन सड़कों की बदहाली का सबसे बड़ा कारण पिछली सरकार के दौरान एक तरफ माफिया नदियों से लाल खजाना लूटने में लगे रहे तो दूसरी तरफ ओवरलोड मौरम भरे वाहनों ने सड़कें पूरी तरह से छलनी करके रख दीं और शासन प्रशासन इनकी तरफ से आंखें मूंदे बैठे रहे। हालांकि सड़कों के कायाकल्प की उम्मीद सपा शासन के आखिरी दिनों में उस वक्त बढ गई थी जब सभी प्रमुख सड़कों चाहे उरई से कोंच रोड की बात हो या एट से कोंच या कोंच से जालौन रोड की, सभी के निर्माण कार्य प्रारंभ करा दिये गये थे, लेकिन निजाम बदलने के साथ ही सारे कार्य ठप पड़ गये हैं। कोंच कैलिया मार्ग, कोंच नदीगांव मार्ग, कोंच जालौन मार्ग, कोंच पहाडगांव मार्ग, कोंच कमसेरा मार्ग, कोंच महेशपुरा मार्ग के हालात भी देखने लायक हैं जिन पर सफर करना जंगल सफारी जैसा ही है। जिला पंचायत अध्यक्ष सुमन निरंजन के गांव विरगुवां तक पहुंचने के लिये हालांकि सिमिरिया और अंडा से लिंक रोड हैं लेकिन सभी की हालत इतनी खराब है कि इन पर चल पाना मुश्किलों भरा है। कोंच के हटवारे से गये चांदनी सम्पर्क मार्ग की गिट्टी बर्षों से उखड़ी पड़ी है, सड़क के बीचोंबीच ऐसे गड्ढे हैं जो सीधा मौत को आमंत्रण देने बाले हैं, नहर पुल के पास सड़क रोप-वे में तब्दील हो चुकी है। सदूपुरा से सिवनी की ओर जाने बाली सड़क का भी बुरा हाल है, उखड़ी सड़क और खुली पड़ी गिट्टी वाहनों की रफ्तार थामने के लिये काफी है। ऐसे में देखना काफी दिलचस्प होगा कि योगी का 15 जून तक सभी सड़कों के गड्ढा मुक्त करने का फरमान धरातल पर कितना उतर पाता है।







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