उरई : एट थाना क्षेत्र में ग्राम धगुवां कला के पास पत्नी और सात साल के बेटे को गोली मारने के मामले में आरोपी पति को अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। घटना में पत्नी की मौके पर ही मौत हो गई थी जबकि पुत्र गंभीर रूप से घायल हुआ था। आरोपी ने पुलिस को गुमराह करते हुए हत्या को लूट का रूप से देने की कोशिश की थी। पुलिस विवेचना के बाद घटना का सच सामने आया था।
7 अप्रैल 2015 को धगुवां कला निवासी दीप्ति व उसके सात साल के बेटे हर्ष को उसके पति राघवेंद्र पटेल ने गोली मार दी थी। इसमें महिला दीप्ति की मौके पर ही मौत हो गई थी। इस मामले में पति ने पुलिस को पहले सूचना दी कि उसकी पत्नी दीप्ति बच्चे के साथ मायके जा रही थी। इस दौरान रास्ते में बदमाशों ने उसके जेवर लूट कर उसकी हत्या कर दी। सूचना पर पहुंची पुलिस को मामला लूट नहीं बल्कि हत्या होने का शक हो गया। मामले में मृतका के भाई मोहन ¨सह निवासी ग्राम खेड़ा कला थाना एट ने अपने बहनोई राघवेंद्र के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। उसका कहना था कि 10 मई 2005 को दीप्ति की शादी राघवेंद्र पटेल के साथ हुई थी। शुरू में तो उसकी वैवाहिक जीवन ठीक चला, राघवेंद्र के अपनी भाभी के साथ नाजायज संबंध थे, दीप्ति को जब इसका पता चला तो उसने विरोध किया। इसके बाद पति उसे परेशान करने लगा। आखिरकार उसने दीप्ति की सुनियोजित तरीके से हत्या कर दी। पुलिस ने मामले में साक्ष्य संकलित करने के बाद कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की थी। यह मुकदमा एफटीसी कोर्ट में विचाराधीन चल रहा था। गुरुवार को न्यायाधीश नरेंद्र कुमार तृतीय ने मुकदमें में अपना फैसला सुना दिया। उन्होंने साक्ष्यों के आधार पर आरोपी पर दोषसिद्ध पाया। न्यायाधीश ने अपने आदेश में लिखा कि अभियुक्त द्वारा अपनी पत्नी व अपने पुत्र जिसकी उम्र सात वर्ष की हत्याकारित की, जो स्वस्थ समाज एवं सुशासन के लिए तमाचा है। ऐसे में आरोपी राघवेंद्र उर्फ रामलला पटेल को हत्या के अपराध में अजीवन कारावास एवं 30 हजार रुपये के अर्थ दंड की सजा दी। सहायक शासकीय अधिवक्ता मोती लाल पाल ने बताया कि सजा सुनाए जाने के बाद आरोपी को पुलिस अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया।






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