
उरई /विद्यालय शिक्षा का मंदिर होते है उन्हें शिक्षा का मंदिर बनाया जाये। किसी हाल में विद्यालय शोषण का मंदिर न बनने पाये। निर्धारित मानक के अनुरूप ही फीस ली जाये, ड्रेस व किताब/कापियां विद्यालय अथवा निश्चित दुकान से खरीदने हेतु अभिभावकों को विवश न किया जाये। बच्चों को ले जाने वाले वाहनों का फिटनेस जरूर करायें तथा ड्राईवर व स्टाॅफ का पुलिस वेरीफिकेशन भी अवश्य करा लें। बच्चों के अन्दर स्वच्छता जागरूकता तथा पानी की बचत के संस्कार को बढ़ावा दिया जाये।
उक्त विचार जिलाधिकारी नरेन्द्र शंकर पाण्डेय ने विद्यालयों के प्रिंसिपलों एवं मैनेजरों की बैठक में व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि यदि अपरिहार्य कारणों से सत्र के बीच में बच्चों को विद्यालय छोड़ना पड़ता है तो उससे सिर्फ शिक्षण समय का ही शुल्क लिया जाये। बच्चों को शुद्ध पेयजल का व्यवस्था कराई जाये। उन्हें सफाई के प्रति जागरूक किया जाये। सप्ताह में एक दिन सफाई अभियान का रखा जाये जिसमें शनिवार का दिनठीक रहेगा। इस दिन बच्चे व स्टाॅफ मिलकर विद्यालय की सफाई व्यवस्था पर विशेष ध्यान दें। बच्चों में खास तौर पर पानी बचाने के तरीके समझाये जाये। पानी की बरबादी किसी भी हाल में न होने पाये।
पुलिस अधीक्षक ने उपस्थित शिक्षकों, प्रिंसिपलों को सम्बोधित करते हुए कहा कि छात्र/छात्राओं की सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जाये। इसके लिए विद्यालय में सी0सी0टी0वी कैमरे लगाये जाये। ड्राईवर, वाहन का वेरीफिकेशन व स्टाॅफ तथा विद्यालय के स्टाॅफ का पुलिस वेरीफिकेशन अवश्य करायें।






Leave a comment