उरई। जालौन-औरैया रोड पर हुए गैंग रेप मामले में पुलिस अभी तक अंधेरे में तीर चलाने के लिए मजबूर है। घटना में लिप्त अपराधियों के बारे में अभी तक कोई ठोस सुराग नही लग पाया है।
गैंगरेप मामले में कैंप करने आये झांसी रेंज के डीआईजी शरद सचान शनिवार की शाम को ही वापस हो गये। जांच टीमों के बीच समन्वय का काम अपर पुलिस अधीक्षक सुभाष चंद्र शाक्य कर रहे हैं। छानबीन के लिए सदर सीओ अरुण कुमार सिंह, सीओ जालौन संजय शर्मा कोतवाली जालौन, सर्विलांस टीम और कुठौंद पुलिस की टीमें अलग-अलग एगिंल पर काम कर रही हैं। सुराग लगा है कि लोडर में बैठे बदमाशों ने एक जगह शराब ली थी। जिसके पास विवाह समारोह भी है। बदमाशों का एक साथी विवाह समारोह में भी कुछ देर के लिए गया था। उस विवाह समारोह में फोटोग्राफी और वीडियो ग्राफी करने वाले की भी मदद पुलिस बदमाशों को पहचानने के लिए ले रही है। कुठौंद क्षेत्र में चलने वाले सभी लोडरों के नंबर, ड्राइवरों के नाम और फोटो की डिटेल भी पुलिस टीमें कलेक्ट करा रही हैं। इसके अलावा दूध डेयरियों पर जितनी गाड़ियां लगी हैं उनकी भी सूची तैयार की जा रही है। सड़क किनारे कई दुकानों पर सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। उनके फुटेज भी अपराधियों को पहचानने में मदद दे सकते हैं। लेकिन पुलिस की इतनी मशक्कत का अभी तक कोई रिजल्ट सामने नही आ पाया है। हालांकि एडीशनल एसपी सुभाष चंद्र शाक्य का कहना है कि क्षेत्र में सक्रिय हिस्ट्रीशीटरों के बारे में भी पड़ताल कराई गई थी जिनमें से कुछ चेहरों पर जांच की सुईं पहुंचकर टिक गई है और उम्मीद है कि इस लाइन पर पुलिस केस को एक-दो दिन में ही वर्कआउट कर लेगी।

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