उरई । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पत्नी जसोदा बेन ने जिले में  बेटी बचाओ , बेटी  पढ़ाओ के नारे को बुलंद किया लेकिन जब इसमें राजनीतिक निहितार्थ तलाशने की कोशिश पत्रकारों ने की तो उन्होने फौरन राजनीतिक चर्चा में तीखी अरुचि जता कर इस पर विराम लगा दिया ।

उत्तर प्रदेश में सजातीय सामाजिक कार्यक्रमों में अचानक सक्रियता बढ़ाने के क्रम में जसोदा बेन शनिवार को देर रात आगरा इलाक़े से जिला मुख्यालय पहुँचीं । उनके साथ उनकी बहिन श्वेता , भाई आनंद और भतीजा जसवंत आदि परिजन भी थे । उन्होने लोक निर्माण विभाग के निरीक्षण गृह में रात्रि विश्राम किया  । रविवार को सुबह सबसे पहले उन्होने ठड़ेश्वरी मंदिर मे दर्शन किए । इसके बाद वे कोंच के लिए निकल पड़ी । उन्होने पनियारा में राहुल राठौर के यहाँ एक निजी कार्यक्रम में भाग लिया ।

 

 

इस दौरान महिला थानाध्यक्ष नीलेश कुमारी सहित पुलिस का पर्याप्त बंदोबस्त सुरक्षा के लिए था । कोंच से जसोदा बेन कमसेरा , अमखेड़ा होती हुईं माधौगढ़ में बहादुर सिंह डिग्री कालेज में आयोजित जिला राठौर समाज के सामूहिक विवाह  समारोह में भाग लेने पहुँचीं । उन्होने सबसे पहले नव विवाहित 51 युगलों को आशीर्वाद दिया । इसके बाद मंच पर पहुँच कर संक्षिप्त भाषण में कहा कि उनका उद्देश्य महिलाओं की स्थिति को मजबूती प्रदान करना और राठौर साहू समाज की एकजुटता को बढ़ाना है । उनके गुजराती लहजे की वजह से लोगों को उनका भाषण समझने में कठिनाई हो रही थी । वापस जाते समय उन्होने पत्रकारों से एक मिनट के लिए बात की । इसमें राजनीति का जिक्र आते ही वे छिटक गयीं और यह कहते हुए निकल गयीं कि वे यहाँ केवल अपने समाज के नए जोड़ों को आशीर्वाद देने के लिए आयीं थी । उन्हे राजनीति से कोई वास्ता नहीं है

उनके कार्यक्रम को ले कर सुबह तक प्रशासन सामान्य था  लेकिन माधौगढ़ के सामूहिक विवाह समारोह में उनके पहुँचते – पहुँचते प्रशासन की त्यौरी  बदल चुकी थी । कार्यक्रम के आयोजक और माधौगढ़ की ब्लाक प्रमुख सोनिया राठौर के पति अरविंद राठौर को अधिकारियों ने कार्यक्रम तत्काल तत्काल ख़त्म करने के लिए हड़काया । कार्यक्रम स्थल से सुरक्षा के तामझाम को गायब रखने की सायास कोशिश भी नजर आई । पुलिस मौजूद तो थी लेकिन माधौगढ़ के प्रभारी निरीक्षक सहित पुलिस के सभी लोग सादी ड्रेस में थे ताकि उनके कारण कार्यक्रम का कोई भौकाल न दिखे । यहाँ तक कि प्रशासन की ओर से पत्रकारों से भी जसोदा बेन के कार्यक्रम को महत्व न देने का अनुरोध किया गया । यह किसके इशारे पर  और किस प्रयोजन से हुआ यह स्पष्ट नहीं हुआ ।

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