
उरई।: सरकार बुंदेलखंड के लिए छप्पर फाड़कर हैंडपम्प दे रही है बही अधिकारी तुले बैठे है कि प्यास से तड़पते गरीवों को पानी की एक बूंद तप तक नही मिलने देगे जब तक उन्हें मुँह मांग सुविधा शुल्क न मिल जाये भले ही इस वीच किसी के प्राण निकल जाए अधिकारियों की बला से ।
किस्सा कही दूर का नही जिला प्रशासन के नाक के नीचे जिलामुख्यालय से सटे डकोर व्लाक के राहिया ग्राम का है जहाँ पर ऊँचाई पर बसे दलितों के लिए हैंडपम्प नही पहुचने दिया जा रहा है जिससे उनको नीचे काफी दूर से पानी लेकर चढ़ कर आने में भारी दिक्कत झेलनी पड़ती है । इस वजह से वे जरूरत से तहत कम पानी की व्यवस्था कर पाते है जिसके चलते गर्मियों में भी काफी देर इन्हें अपनी प्यास पर काबू रखने की मशक्कत करते देखा जाता है । इस बस्ती में रहने बाले प्रेम चंद पुत्र छक्की लाल ने वताया कि वर्ष 2016 में गांव में विधायक निधि से दो हैंडपम्प लगाने की मंजूरी मिली थी जिसमे उनकी बस्ती को प्राथमिकता थी लेकिन लेकिन बस्ती के लोगो ने सुविधाशुल्क नही दे पाया जिससे उन्होंने दूसरी जगह 20 मीटर की दूरी पर हैंडपम्प लगवा दिया जोकि मानक के विरूद्ध है जबकि उनकी बस्ती की नजदीक के हैंडपम्प से बेहद करीबी की फर्जी रिपोर्ट बनाकर भेज दी ।
इस वर्ष उम्मीद थी कि उक्त बस्ती का नंबर आ जायेगा लेकिन सुविधा शुल्क के चक्कर मे फिर गलत सर्वे रिपोर्ट भेज कर उक्त बस्ती को प्यासे रहने के लिए मजबूर किया जा रहा है । क्या न्यायप्रिय जिलाधिकारी राहिया की उक्त दलित बस्ती के साथ न्याय करने के लिए जलनिगम के अधिकारियों को मजबूर करेगे ।






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