
उरई । लगातार सूखे से हुई तबाही का जीता जागता नमूना बन चुके गढर को किसानों की कब्रगाह के रूप में पहचाना जाने लगा है । जालौन जिले की उरई तहसील के इस गाँव में पिछले एक दशक से एक दशक से अधिक समय से किसानों की आत्महत्या का सिलसिला जारी है । योगी सरकार में भी यह क्रम नहीं थमा है । मंगलवार को देर शाम इस गाँव के एक किसान की सलफास की गोलियाँ खा लेने से मौत हो गई ।
45 वर्षीय बेनी प्रसाद पाल के पिता मोहर सिंह अभी जिंदा हैं जिन्होने बताया कि उनके परिवार में पहले ही हिस्सा बाँट हो गया था । बेनीप्रसाद 11 बीघा जमीन ले कर 5 वर्षों से जालौन के नजदीक अपनी ससुराल भदवा गाँव में रहने लगा था । खेती की बिगड़ती हालत और दूसरी ओर तीन बेटा , बेटियों की परवरिश और उनकी शादियों में हुए खर्च से आर्थिक तंगी का शिकार हो कर वह बुरी तरह टूट गया था । गत 4 मई को जब उसने अपनी छोटी बेटी रीमा की शादी की तो उसे अपना मकान बेचना पड़ा ।पहले से भी उस पर बैंक कर्ज लदा था । ऊपर से पुत्र ओमप्रकाश की उम्र 25 वर्ष हो गई थी फिर भी उसका कोई काम धंधा नहीं जम पाया था । इसे ले कर बहू बेटे में रोज रोज चख – चख होने से परेशान बेनी प्रसाद डिप्रेशन में चला गया था ।

मंगलवार को वह गढर आया और गाँव के बाहर बने आश्रम में चला गया । वहीं उसने थोक में सल्फास की गोलियाँ खा ली । हालत बिगड़ने पर घर वालों को पता चला तो वे उसे फौरन जिला अस्पताल ले गए लेकिन हालत ज्यादा खराब होने की वजह से उसे जिला अस्पताल से मेडिकल कालेज झांसी के लिए रेफर कर दिया गया । झांसी ले जाते समय उसने रास्ते में ही दम तोड़ दिया ।
गढर में मौत को गले लगा चुके कई किसान
गढर में 2006 से अभी तक कई किसान मौत को गले लगा चुके हैं । जिनमें छक्कीलाल ने गत वर्ष आत्महत्या की थी । इसके अलावा गुलाब सिंह , यतीश कुशवाहा , मोहन निरंजन , अला निरंजन आदि ने भी खुदकुशी की थी ।






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