0 13वीं बरसी पर याद किये पूर्व पालिकाध्यक्ष अशोक शुक्ला
कोंच-उरई। पूर्व पालिकाध्यक्ष स्व. अशोक शुक्ला की तेरहवीं पुण्य तिथि पर जिले की तमाम राजनैतिक और गैर राजनैतिक नामचीन हस्तियों ने उनकी श्रद्घांजलि सभा में शिरकत कर स्व. शुक्ला को कोंच का ऐसा महान व्यक्तित्व निरुपित किया जिसने यहां के विषाक्त वातावरण को सुधारने में अपना क्रांतिकारी योगदान दिया। इसके अलावा नगर व क्षेत्र के भी सैकड़ों लोगों ने अपने प्रिय नेता को भावसिक्त श्रद्धाप्रसून समर्पित कर उन्हें याद किया। पालिकाध्यक्ष रहते वर्ष 2004 में उनकी निर्मम हत्या कर दी गई थी। श्रद्धांजलि सभा के मुख्य अतिथि पूर्व सदर विधायक विनोद चतुर्वेदी ने इस मौके पर उनके कृत कार्यों का स्मरण करते हुये कहा कि उन्होंने अपना पूरा राजनैतिक जीवन एक खुली किताब की तरह रखा और पालिकाध्यक्ष रहते उन्होंने जहां नगर विकास के नये आयाम गढे वहीं उन्होंने गोवंश बध पर बल्कि पशु वध पर भी पूर्ण प्रतिबंध लगा कर नगर के विषाक्त वातावरण में नई उम्मीदों का संचार किया। ऐसे व्यक्तित्व को बारंबार नमन करने का मन करता है।
स्थानीय दि अशोका विवाह वाटिका के विशाल सभागार में आज पूर्व पालिकाध्यक्ष स्व. अशोक शुक्ला की तेरहवीं पुण्य तिथि पर पूर्व बारसंघ अध्यक्ष संतलाल अग्रवाल की अध्यक्षता, उरई के पूर्व सदर विधायक विनोद चतुर्वेदी के मुख्य आतिथ्य प्रेस क्लब अध्यक्ष प्रियाशरण नगाइच, पूर्व जिपं सदस्य महेश तिवारी पिरौना, जिपं अध्यक्ष प्रतिनिधि देवेन्द्र सिंह निरंजन, पूर्व जिलाध्यक्ष सपा चैधरी धीरेन्द्र यादव, कांग्रेस नगर अध्यक्ष प्रभूदयाल गौतम, क्रय विक्रय समिति के अध्यक्ष हरिश्चंद्र तिवारी, एलएसएस जुझारपुरा के अध्यक्ष प्रतिपालसिंह गुर्जर, दरिद्र नारायण सेवा समिति के संयोजक कढोरेलाल यादव, हाजी सेठ नसरुल्ला, मिजाजीलाल निरंजन, डॉ. एलआर श्रीवास्तव आदि के विशिष्ट आतिथ्य में संयोजित श्रद्धांजलि सभा के दौरान लोगों ने स्व. शुक्ला के ऊंचे कद का बखान करते हुये कहा कि वे एक दृढ प्रतिज्ञ, निडर और जांबाज पालिकाध्यक्ष के रूप में जाने गये। उन्होंने कोंच का कुख्यात स्लॉटर हाउस बंद करवा कर जहां राजनैतिक रूप से सत्तादल के दबाव झेले वहीं न्यायालय के आदेशों के बाबजूद पशु बध प्रतिबंध की अपनी नीति से समझौता नहीं करके अवमानना के वादों का भी सामना किया। इस तरह नगर में पशु बध पर पूर्ण प्रतिबंध लगा कर यहां की आबोहवा को प्रदूषित होने से बचाया और गोवंश रक्षकों में अपना नाम शुमार कराया जिसके लिये संतों ने उन्हें बड़े मंचों से सम्मानित किया। इस दौरान अनिल वैद, लल्लूराम मिश्रा आदि ने भी कार्यक्रम को सम्बोधित किया। संचालन लालप्रताप सिंह ने किया एवं आभार प्रमोद शुक्ला ने जताया।
कवि हृदय रामकृष्ण वर्मा, वीरेन्द्र त्रिपाठी, मन्नू पेंटर ने स्व. शुक्ला को काव्यांजलि समर्पित की, कृष्णकुमार शर्मा, किशोर यादव, योगेन्द्र अरूसिया, ब्राह्मण महासभा अध्यक्ष देवीदयाल रावत, सनाढ्य सभा अध्यक्ष मनोज दूरवार, प्यारमोहम्मद, महेश तीतरा, डॉ. ब्रजमोहन राठौर, हबीब मंसूरी, वीरेन्द्र मिठया, कमलेश गिरवासिया, विनोद दुवे, पुरुषोत्तम राठौर, राममोहन राठौर, रुचिर नायक, अनुरुद्ध मिश्रा, रमेशदत्त मिश्रा, आनंद दुवे, शेखर शुक्ला, अनिल पटैरया, विनोद गुप्ता, संतोष नायक, अरविंद भाटी, विक्कू शुक्ला, गोविंद शुक्ला, गोपाल शुक्ला, मनोज दूरवार, विजयसिंह पनयारा, राहुल तलवाड़, अहमदखां, दीपक मिश्रा, जीतू विरगुवां, रवि गौतम, जगदीश अग्रवाल, कल्लू कनकने, अजय रावत, श्याममोहन रिछारिया, मयंकमोहन गुप्ता, आनंद सेठ, रामशरण अग्रवाल, हरिकिसुन राठौर, पवन गौतम, राघवेन्द्र तिवारी, पप्पू बादशाह, धु्रवप्रताप सिंह, मिथलेश गुप्ता, नंदराम स्वर्णकार, मिरकू महाराज, शैलेष सोनी, आनंद पचैरी सामी, डॉ. बाबूराम शर्मा, डॉ. हर्ष गुप्ता, कुक्कू राठौर, राजेन्द्र दुवे, संजय दतियाबाले, राममोहन रिछारिया, रिंकू धनौरा, प्रदीप अग्रवाल, रवीन्द्र अग्रवाल, ओमप्रकाश कौशिक, केके गुप्ता, सचिन शुक्ला, संजय अग्रवाल, ओमी कुशवाहा, केशव बबेले, रामदास शिवहरे, रामबाबू अग्रवाल, राघवजी गुर्जर, पप्पू मोटे, सत्यम गुप्ता, साकेत पटैरया, शिवकुमार निरंजन, सुधीर दुवे, महेन्द्र सोनी, अर्चना मयंक, सुरेन्द्र मयंक, काजी जाहिद, सौरभ अग्रवाल, रामसिया आचार्य, रणधीर यादव, बबलू दीक्षित, पंकज भइया, पवन तिवारी, अजय यादव, शिवम गुर्जर, संजय मित्तल, राकेश वर्मा, अनिल पटेल, गोलू शुक्ला, अंशुल मिश्रा, संतोष तिवारी, ओंकारनाथ पाठक आदि मौजूद रहे।

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