उरई। मीडिया के ऊपर लोकतंत्र को बेहतर बनाने की बड़ी जिम्मेदारी है। समाज जैसी खबरें अखबार में पढ़ता है या टीवी चैनलों में देखता ह उसका उस पर असर होता है। इसलिए पत्रकारों को तथ्यों के साथ कोई खिलवाड़ नहीं करना चाहिए। यह विचार जिलाधिकारी नरेंद्र शंकर पांडेय ने व्यक्त किए। वह आज मंडपम सभागार में उत्तर प्रदेश जर्नलिस्ट एसोसिएशन (उपजा) के तत्वावधान में हिंदी पत्रकारिता दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के नाते संबोधित कर रहे थे। जिलाधिकारी ने कहा कि महर्षि विश्वामित्र ने अपनी तपस्या के बल पर एक राजा को शरीर सहित स्वर्ग भेजने की कोशिश की थी। लेकिन देवताओं के विरोध के कारण राजा त्रिशंकु बनकर बीच में लटक गए। उन्होंने कहा कि पत्रकार महर्षि विश्वामित्र की तरह किसी को भी स्वर्ग के दर्शन तो करा सकते हैं लेकिन सशरीर स्वर्ग नहीं भेज सकते। यानी पत्रकार का दायित्व है कि सच्चाई को शासन प्रशासन के समक्ष उजागर करके उसने पीड़ितों को न्याय दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करें। श्री पांडेय ने कहा कि समाज व देश को बेहतर बनाने में मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्हें अपनी इस महत्वपूर्ण भूमिका को संवेदनशीलता के साथ निभाना चाहिए। विशिष्ट अतिथि पुलिस अधीक्षक स्वप्निल ममगाई ने कहा कि पत्रकार लोकतंत्र के सजग प्रहरी है। पुलिस प्रशासन को तमाम तथ्य तथा नई नई जानकारी पत्रकारों से मिलती है। जो पीड़ितों को न्याय दिलाने में सहायक होती है। इसलिए खबरें चाहे प्रिंट मीडिया की हो या इलैक्ट्रानिक मीडिया की। वह हमें प्रेरणा देने का काम करती है। उन्होंने कहा कि आईपीएस बनने की तैयारी में अखबारों का उनके जीवन में बड़ा योगदान है। इसलिए मीडिया के प्रति उनके मन में आदर है। सीपीआई के प्रांतीय व जुझारू नेता कैलाश पाठक ने कहा कि चूंकि हिंदी पत्रकारिता दिवस में उपजा के पत्रकार इस दिन आत्मलोचन करते हैं। इसलिए वे कहते है कि समय का ध्यान आयोजकों तथा अतिथियों को रखना चाहिए। क्योंकि समय से बड़ा कोई नहीं है। पत्रकारों को चाटुकारिता से बचना चाहिए तथा जनता के हित की लड़ाई लडनी चाहिए। सर्जन डा. रमेश चंद्रा ने कहा कि आजादी के बाद पिछले 70 सालों में हर क्षेत्र में गिरावट आई है। पत्रकारिता भी इसका अपवाद नहीं है। पहले पत्रकारिता एक मिशन होती थी। आज कमीशन की तरफ बढ़ रही है। समाज को यह देखना होगा कि अभाव में अपनी घर गृहस्थी चलाने वाले पत्रकार कैसे अपना जीवन चलाते है। सपा के प्रांतीय नेता इंद्रजीत यादव ने कहा कि जिन देशों में तानाशाही है वहां के लोगों में लोकतंत्र व मीडिया न होने का गहरा अहसास होता है। जालौन जिले के पत्रकार मेहनती, ईमानदारी व लगनशील है और जिले में हर समस्या में खुलकर अपने लेखन से पीड़ितो का साथ देते है। जनता दल युवा के राष्ट्रीय अध्यक्ष शैलेंद्र यादव ने कहा कि आज के परिवेश में मीडिया अहम भूमिका निभाता है क्योंकि देश व समाज में घट रही अच्छी व बुरी घटनाओं से लोगों को जागरुक रहना चाहिए। पत्रकारों को अपने आचरण पर विशेष ध्यान देना चाहिए। भारतीय किसान संघ के प्रांतीय अध्यक्ष साहब सिंह चैहान ने कहा कि सही मायने में पत्रकार वही है। जो चाटुकारिता से दूर रहकर समाज को सत्य का आईना दिखाए। डा. कुमारेंद्र सिंह सेंगर ने कहा कि सोशल मीडिया एक बड़ी ताकत बनकर उभरी है। लेकिन इसका कहीं कहीं दुरुपयोग भी हो रहा है। सोशल मीडिया के आने से अब खबरें दबाई नहीं जा सकती है। शिक्षाविद अशोक राठौर ने कहा कि चाहे सोशल मीडिया का विस्तार हो या इलैक्ट्रानिक मीडिया का भारी प्रचार हो। लेकिन आज भी लोगों की सुबह अखबार से होती है। हालांकि इस दौर में प्रिंट मीडिया की चुनौती बढ़ी है। उन्होंने सुझाव दिया कि वरिष्ठ पत्रकार जो भी नए पत्रकार बनाए, उन्हें पत्रकारों के उद्देश्य अवश्य बतलाए ताकि वे अपनी बात दमदारी से रख सके। सपा जिलाध्यक्ष वीरपाल यादव दादी ने कहा कि आज समाज के अधिकांश लोग आंख मूंदकर कैसे भी पैसा बनाने की अंधी दौड़ में लगे हुए हैं। ऐसे में मीडिया की भूमिका और महत्वपूर्ण हो जाती है। क्योंकि अधिकांश पत्रकार अभाव में रहते हैं। सत्य को उजागर करते हैं। भाजपा लोकसभा क्षेत्र के प्रभारी अनिल बहुगुणा ने कहा कि देश की अस्सी फीसदी आबादी अपनी सुबह की शुरूआत अखबार पढकर करती है और उसमें लिखे पर काफी हद तक विश्वास करती है। इसलिए पत्रकारों को निष्पक्षता से कोई समझौता नहीं करना चाहिए। शिक्षक कर्मचारी मोर्चा के जिलाध्यक्ष लाल सिंह चैहान ने कहा कि मीडिया पर आज भी पीड़ित जनता को बहुत भरोसा है। इसलिए पूरी निष्पक्षता से पीड़ितों की आवाज बुलंद करनी चाहिए। वरिष्ठ कांग्रेसी नेता सत्यपाल शर्मा ने अपने संबोधन में उन लोगों की आलोचना की, जो डीएम व एसपी के जाने के बाद तुरंत चले गए। उन्होंने कहा कि जब हमने अपनी कही तो दूसरे वक्ताओं की भी बात सुननी चाहिए। पत्रकार एक डाक्टर की तरह होता है। जो समाज के तमाम विकारों को अपनी कलम से दूर करने की कोशिश करताहै। पूर्व सांसद घनश्याम अनुरागी ने कहा कि ईमानदार पत्रकार अपनी कलम से कभी समझौता नहीं करते हैं। इसके पूर्व वरिष्ठ पत्रकार अयोध्या प्रसाद गुप्त कुमुद ने हिंदी पत्रकारिता दिवस के इतिहास के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि कैसे हिंदी पत्रकारिता में चाहे कोटरा (जालौन) के निवासी मूलचंद्र अग्रवाल हो जिन्होंने 1917 में कोलकाता में विश्वामित्र अखबार निकाला। जयचंद्र गुप्त ने झांसी से 1942 दैनिक जागरण झांसी तथा पूर्णचंद्र गुप्त ने 1947 में दैनिक जागरण कानपुर का प्रकाशन किया है। दैनिक भास्कर का प्रारंभ झांसी से हुआ है। हिंदी पत्रकारिता के इतिहास में जालौन का अभूतपूर्व योगदान है। क्योंकि दैनिक जागरण, भास्कर व विश्वामित्र के मालिकों का इसी जनपद से संबंध है। उपजा जिलाध्यक्ष अरविंद द्विवेदी ने कहा कि पत्रकारों पर कोई भी मुकदमा लिखने से पूर्व सीओ व एसडीएम से संयुक्त विवेचना करा लेनी चाहिए। वरिष्ठ पत्रकार अनिल शर्मा ने कहा कि समाज यह तो चाहता है कि शिक्षक, पत्रकार, गायक, कलाकार ईमानदार रहे लेकिन वह ईमानदार लोगों के घर जाकर यह नहीं देखता है कि उसकी गृहस्थी का चूल्हा कैसे जल रहा है। यदि हमें अच्छा समाज बनाना है तो इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए। साहित्यकार यज्ञदत्त त्रिपाठी ने कहा कि समाचार जानने की आकांक्षा हर व्यक्ति को रहती है। लेकिन पत्रकार जितना जोखिम उठाकर खबरें बनाते है। इसकी चिंता समाज नहीं करता है। संगोष्ठी में कांग्रेस जिलाध्यक्ष चैधरी श्यामसुंदर, राजीव नारायण मिश्रा, उपजा जिला उपाध्यक्ष संजय गुप्ता, उपजा कोषाध्यक्ष ओमप्रकाष राठौर, विनय गुप्ता, शििवकुमार जादौन, इबादत अली शानू, देवेन्द्र सिंह जादौन, गोविन्द सिंह दाऊ, श्याम सक्सेना, पत्रकार चैधरी बृजेंद्र मयंक, नाथूराम निगम, आबिद नकवी, अजय सहारा, ज्ञानेंद्र मिश्रा, अधिवक्ता सैय्यद युसूफ इश्तियाक, शिक्षाविद अजय इटौदिया, सुनील शर्मा गढर, मनोज जाटव, धर्मेंद्र द्विवेदी, राजू पाठक, आलोक खन्ना, गंगाराम चैरसिया, अलीम सिद्दीकी, रामेश्वर प्रसाद त्रिपाठी, राकेश तिवारी, रमाशंकर शर्मा, महेश स्वर्णकार, अखिलेश यादव, उपेंद्र शर्मा, अचल शर्मा, उस्मान, हेमंत दाऊ, अमित द्विवेदी, अनुराग श्रीवास्तव, इसरार खान, अशोक पुरवार, अकील, रामआसरे त्रिवेदी, जाबिर अली, अब्दुल जमील, प्रदीप त्रिपाठी, नीरज प्रजापति, कुलदीप गोस्वामी, शशि शेखर दुबे (राहुल), बृजमोहन निरंजन, केपी सिंह सुन्नू, भरत अवस्थी, सुशील सक्सेना, सतीश द्विवेदी, रामप्रकाश पुरवार, सतीश द्विवेदी, रामनरेश द्विवेदी, सट्टू कुठौंद ने भी ग्रामीण पत्रकारों की पीड़ा बताई। इसके पूर्व वीरेंद्र तिवारी, शफीकुर्रहमान कश्पी, कृपाराम कृपालु, सिद्धार्थ त्रिपाठी, मिर्जा साबिर बेग ने अपनी गजलों से समां बांधा। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ पत्रकार अनिल शर्मा ने किय






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