0 शौचालय बनवाने के लिये पहली किश्त जारी की नगर पालिका ने
0 वार्ड संख्या 1 से 11 तक के छह सैकड़ा लोगों को जारी हुये अनुदान पत्र
कोंच-उरई। भारत सरकार की अति महत्वाकांक्षी योजना स्वच्छ भारत अभियान के तहत खुले में शौचमुक्त भारत की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में उन लोगों जिनके घरों में शौचालय नहीं हैं, को शौचालय निर्माण के लिये शहरी क्षेत्र में दिये जाने बाले आठ हजार रुपये के अनुदान में पहली किश्त चार हजार रुपये शनिवार को पात्रों को आवंटित कर दिये गये। अनुदान पाने की पात्रता की पहली शर्त यही है कि उसके घर में शौचालय नहीं हो। इलाकाई विधायक मूलचंद्र निरंजन ने इस अवसर पर लोगों से कहा कि प्रधान मंत्री के स्वच्छ भारत अभियान को तभी सफल बनाया जा सकता है जब आम जन की इसमें सक्रिय सहभागिता हो।
नगर पालिका परिसर में अनुदान पत्रक पात्रों को देने के लिये कार्यक्रम आयोजित किया जिसकी अध्यक्षता पालिका चेयरपर्सन विनीता सीरौठिया ने की तथा मुख्य अतिथि क्षेत्रीय विधायक मूलचंद्र निरंजन व विशिष्ट अतिथि चेयरपर्सन प्रतिनिधि विज्ञान विशारद सीरौठिया, ईओ रवीन्द्र कुमार तथा भाजपा नगर अध्यक्ष प्रदीप गुप्ता, गुलाबी गिरोह की शीर्ष कमांडर अंजू शर्मा रहे। विधायक ने बताया कि केन्द्र सरकार स्वच्छ भारत अभियान पर गंभीरता से कार्य कर रही है और आगामी 2 अक्टूवर 2018 तक संपूर्ण भारत को खुले में शौचमुक्त के लक्ष्य को प्राप्त कर लेने की दिशा में आगे बढ रही है। उन्होंने बताया कि शहरी क्षेत्र में शौचालय निर्माण के लिये आठ हजार रुपये अनुदान दिया जा रहा है जिसमें पहली किश्त चार हजार रुपये का पत्रक पात्रों को दे दिया गया है। शेष चार हजार शौचालय निर्माण करा लेने के बाद सीधे पात्र के बैंक खाते में पहुंचा दिये जायेंगे। ईओ रवीन्द्रकुमार ने बताया कि कोंच पालिका क्षेत्र में अब तक कुल 1 हजार 867 आवेदन ऑन लाइन भरे गये थे जिनमें 975 लोगों के स्वीकृत हुये हैं। आज वार्ड संख्या 1 से 11 तक के 589 पात्रों को आधी राशि दी जा रही है, शेष को भी दो-चार दिन में वितरित कर दी जायेगी। इस राशि से शौचालय न बनवा कर अन्य मद में खर्च करने बालों से पूरी धनराशि बसूल कर ली जायेगी। संचालन सभाद राघवेन्द्र तिवारी ने किया।
कैसे बनेगा आठ हजार में शौचालय
आज पालिका में शौचालय निर्माण की पहली किश्त लेने के लिये उमड़ी भीड़ में से ही निकल कर आये कस्बे के कृष्णविहारी सोनी ने सरकार की इस योजना में निर्धारित की गई आठ हजार की धनराशि को हास्यास्पद बताते हुये कहा कि यह तो लोगों को सरासर बेबकूफ बनाने जैसा है क्योंकि अव्वल तो आठ हजार रुपये में शौचालय की कौन कहे, उसका गड्ढा तक नहीं बन सकता, दूसरे निर्माण के लिये बालू की जरूरत पड़ती है और बालू पर सरकार की लगाम है। चोरी छिपे अगर बालू की जुगाड़ कोई कर भी लेता है तो एक ट्राली बालू की कीमत ही नौ हजार से दस हजार के बीच है।





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