उरई। ईमानदारी का ढिढोंरा पीटने वाले सीएम योगी और डीजीपी सुलखान सिंह के राज में पुलिस रुपये मिलने की गुंजाइश न दिखने पर किस कदर निष्क्रियता बरतती है इसकी एक विचलित कर देने वाली मिसाल जालौन कोतवाली क्षेत्र में सामने आई है। ग्राम मोहनपुर कुदारी में 1 जून को महिला ने कल्लन, भोले, राघवेंद्र व पंकज आदि के खिलाफ उसके परिवार को उत्पीड़न करने की शिकायत की। जिले में पुलिस के बन चुके रिवाज के मुताबिक जालौन कोतवाली पुलिस ने यह शिकायत रददी की टोकरी में फेंक दी। पुलिस के इस रवैये से जिले भर के दबंग बेखौफ हो चुके हैं। इसी का नतीजा रहा कि शनिवार को पीड़ित महिला के मुताबिक आरोपी उसके घर में घुस आये और सास-ससुर को बंधक बनाकर उसके साथ वीभत्स तरीके से रेप किया और मूंछो पर तांव देते हुए चले गये। अगर पीड़िता का आरोप सही है तो यह प्रदेश सरकार के मुखिया और डीजीपी के लिए शर्मनाक वाकया है। गौरतलब है कि कानपुर जोन के आईजी रहे आशुतोष पाण्डेय ने भरोसे का एक नंबर शुरू किया था जिसमें शिकायत होने पर 24 घंटे के अंदर एक्शन शुरू हो जाता था और सूचना फरियादी के लिए भी प्रसारित कर दी जाती थी। इससे पुलिस में मनमानी और भ्रष्टाचार न्यून हो गया था। उम्मीद की गई थी कि उत्तर प्रदेश के हरिश्चंद्र युग में पीड़ितों की सुनवाई और एक्शन आशुतोष पाण्डेय की व्यक्तिगत कार्य योजना से कई कदम आगे बढ़कर होगा लेकिन आज हालत यह है कि सीएम पोर्टल पर होने वाली शिकायतों तक पर गौर नही किया जाता। जालौन में यह स्थिति चरम सीमा पर है। जिससे पुलिस में भ्रष्टाचार की इंतहा होती जा रही है और निरीह जनता डर-डर कर जीने को मजबूर नजर आ रही है। क्या सीएम और डीजीपी अपनी करनी में भी किसी ईमानदारी का परिचय देने की जरूरत करेंगे।





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