उरई। बालू की अनुपलब्धता से जहां सरकारी विकास कार्य ठप हो गए हैं वहीं हजारों मजदूर दूसरे प्रदेशों में पलायन करने के लिए मजबूर है । राठ रोड की मजदूर मंडी मेन जहां कल तक हर सुबह लगभग एक हजार से अधिक मजदूर और कारीगर एकत्रित हुआ करते थे , आज वहाँ वीरानी छाई हुई है ।
योगी सरकार आते ही खनन की नीति तय न हो पाने से बालू का अकाल पड़ गया है । जनपद में सभी खनन खंडों में तालाबंदी हो चुकी है । कुछ समय पहले एक मात्र पथरेहटा घाट का टेंडर भी हुआ जिसमें अब तक ग्रीन ट्रिब्यूनल द्वारा एनओसी नहीं मिली है। एक ही घाट की नीलामी हुई और उस पर भी ग्रीन ट्रिब्यूनल की तलवार लटक गई। वहीं मध्य प्रदेश से एमएम-11 पर जो बालू आ रही थी उस पर भी मध्य प्रदेश प्रशासन ने कुछ ऐसा अड़ंगा लगा दिया कि आने में व्यवधान पैदा हो रहा है। ऐसी परिस्थितियों में 15 जून तक प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गड्ढामुक्त सड़कों के ऐलान पर पलीता लगना निश्चित है। चोरी छिपे आ रही बालू इतनी महंगी है कि आम आदमी की पहुंच के बाहर होती जा रही है । अगर यही सिलसिला चलता रहा तो आने वाले समय में
लोगों को मकान बनाना एक टेढ़ी खीर साबित हो सकता है। हजारों मजदूर जो विकास कार्यों के सहारे अपनी जीविका को चला रहे थे उनके सामने मरने जैसी स्थिति पैदा हो रही है।
बालू न मिलने से अरबों की सड़कें अधर में
बालू न मिलने के कारण औरैया-उरई, उरई-कोंच, कोंच-जालौन एवं अन्य रोड जिन पर बाहर की एजेंसियां कार्य कर रही थी कार्य ठप हो गया है । प्रांतीय खंड से मिली जानकारी के अनुसार जिन ठेकेदारों ने इन मार्गों पर अपना काम प्रारंभ किया था वे खामोश हो गए हैं । चूंकि उनके अनुसार बालू की पूर्ति नहीं हो पा रही है। मध्य प्रदेश से भी जो बालू आ रही थी वह उनके मानक पर खरी नहीं उतरी ।अगर यही हाल बालू खनन का रहा तो आने वाले समय में रोड निर्माण के लिए भी विभागों को दूसरे विकल्प तलाशने होंगे अन्यथा की स्थिति में इन जनपदों के बचे खुचे रोडों की भी इतनी बुरी दशा हो जाएगी कि उन पर पैदल चलना भी भारी पड़ेगा।





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