जालौन-उरई । सरकार द्वारा बाल श्रमिको के हित के लिये कई कल्याणकारी योजनाओ का संचालन किया जा रहा है। जिन मासूमो के हाथ मे कापी किताब पेन होनी चाहिये उनके हाथ कूडा बीनने, जूता साफ करने तथा होटलो पर चाय व बर्तनों को धोने में सने रहते हैं ।  श्रम अधिकारी  बालश्रम पर सार्थक रोक का प्रयास करने की बजाय कागजो मे खानापूरी कर अपने कर्तव्य की इतिश्री करते रहते हैं ।
नगर मे बच्चे स्कूल जाने की बजाय कूड़ा बीनने या होटलो पर कप प्लेट धोते देखे जाते हैं । फिर भी श्रम विभाग इनके पुनर्वास के लिए हाथ पैर हिलाने की जहमत नहीं उठाता । ऐसे में सर्व शिक्षा अभियान और बाल अधिकारों के संरक्षण का संकल्प धराशायी नजर आ रहा है । क्या योगी सरकार और जिला प्रशासन की नजरें इस ओर इनायत होंगी ।

 

 

 

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