उरई। भ्रष्ट कार्याें पर शिकायत के बावजूद कोई एक्शन न होने से कुछ ही महीने मं भाजपा को भारी बहुमत से प्रदेश में जिताने वाला जनमानस योगी सरकार को लेकर मोहभंग के दौर से गुजरने लगा है। इसे अकर्मण्यता कहें या मक्कारी योगी सरकार में धांधलियों के खिलाफ शिकायतें तो ले ली जातीं हैं लेकिन उन पर कोई कार्यवाही नहीं होती। कुठौंद ब्लॉक के हदरूख गांव में यह स्थिति प्रत्यक्ष रूप से सामने देखी गई। जब दर्जनों ग्रामीणों ने जिले से लेकर प्रदेश स्तर तक के अधिकारियों को उनकी ग्राम पंचायत द्वारा कागजी कार्य कराकर पेमेंट निकालने की शिकायतें भेजीं। गवन के इस गम्भीर मामले में तत्काल जांच और एफआईआर होनी चाहिए थी लेकिन प्रशासन ने कुम्भकरणी निद्रा ओढ़ ली।  सबसे बड़ा गवन सीसी निर्माण में था। जिसमें 15 लाख रूपये बिना कोई कार्य कराये हड़प लिए गये थे। हदरूख के राहुल सिंह, अवधेश सिंह, विजय भदौरिया, अजीत सिंह, देवेन्द्र सिंह, अरविन्द्र सिंह, अखिलेश तिवारी आदि की आपात कार्यवाही के योग्य शिकायत को उच्चाधिकारियों ने ठण्डे बस्ते में डाल दिया। इस बीच उनकी सांठ गांठ से प्रधान ने सबूत नष्ट करने के लिए आनन फानन सीसी का निर्माण करवा दिया। ग्रामीण भ्रष्टाचार को संरक्षण के इस मामले से बुरी तरह खिन्न हैं और इसे योगी सरकार के दुमुंहेपन का नमूना बता रहे हैं। हालांकि कई ग्रामीणों को सीएम योगी पर अभी भी भरोसा है। और उनका कहना है कि अधिकारी सीएम तक सही जानकारी नहीं पहुंचने दे रहे हैं। बहरहाल अगर ऐसा है तो सीएम योगी को हदरूख के मामले को संज्ञान में लेकर प्रधान के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने और उनके कथित भ्रष्टाचार की लीपा पोती करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कड़े कदम उठाने चाहिए।

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