उरई। जिला निगरानी समिति की त्रैमासिक बैठक विकास भवन में सांसद भानूप्रताप वर्मा की अध्यक्षता में हुई। खास बात यह रही कि सत्तारूढ़ पार्टी के जनप्रतिनिधियों तक ने इसमें नौकरशाही के निरंकुश रवैये का रोना रोया। कई मामलों में जांच के आदेश जारी किये गये।  जिला निगरानी समिति को वेहद अधिकार सम्पन्न निकाय माना जाता है। लेकिन आज की बैठक से उजागर हुआ कि अधिकारी इसे हाथी दांत से ज्यादा नहीं मानते जो केवल दिखाने के लिए होते हैं, काम के लिए नहीं। पिछली बैठक में ईंगुई खुर्द गांव में एक विद्युत पोल तालाब के अन्दर गढ़ा होने की बजह से जनजीवन के लिए खतरा जाहिर किया गया था। जिस पर विद्युत विभाग ने कहा था कि तालाब सूखने के बाद खम्भा हटवा दिया जायेगा। लेकिन बैठक में मौजूद सदस्यों ने बताया कि यह खम्भा आज तक नहीं हटा है। इस पर जिलाधिकारी नरेन्द्र शंकर पाण्डेय ने विद्युत विभाग पर नाराजगी प्रकट की। विधान परिषद सदस्य यज्ञदत्त शर्मा के प्रतिनिधि भगवान दास त्रिपाठी ने सदन से शिकायत की कि जल निगम के अधिशाषी अभियंता कोई भी जानकारी मांगने पर शिष्टता से जबाब नहीं देते। सभी जनप्रतिनिधियों और सदस्यों ने उनकी वेदना को गम्भीरता से संज्ञान में लिया और जिलाधिकारी से मगरूर अधिशाषी अभियंता के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की मांग की।  प्रधान मंत्री सड़क योजना के तहत निर्मित बंगरा नावली सड़क की गुणवत्ता पर उंगली उठाते हुए सदस्यों ने इसकी जांच की मांग की। जिलाधिकारी ने जांच का आदेश जारी कर दिया। मेनूपुर, देवकली और गुढ़ा खास में भूमि संरक्षण द्वारा कराये गये कार्याे मंे भारी भ्रष्टाचार की जांच की मांग की गई। नहरों की सिल्ट सफाई में उदासीनता और लापरवाही का आरोप लगाया गया। बैठक में तीनों विधायक, एमएलसी रमा निरंजन, जिला पंचायत अध्यक्ष सुमन निरंजन आदि उपस्थित थे। बैठक का संचालन मुख्य विकास अधिकारी एसपी सिंह ने किया।

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