उरई। राज्य सरकार के कई तकलीफदेह आदेशों के विरोध में कर्मचारी आन्दोलन का जिन्न बोतल से बाहर निकलने के लिए मचल पड़ा है। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने विकास भवन स्थित अपने कार्यालय में रविवार को बैठक आयोजित कर राज्य सरकार के फैसलों के विरूद्ध संघर्ष के आगाज का बिगुल बजा दिया। परिषद के अध्यक्ष रामप्रसाद श्रीवास्तव की अध्यक्षता में हुई। इस बैठक का संचालन जिलामंत्री हरीश राठौर ने किया। जिला कार्यकारिणी के पदाधिकारियों ने सबसे पहले लोगों की शिकायतों की सुनवाई के लिए सुबह 9 बजे से तफ्तर खोलने के आदेश पर विरोध जताया। कर्मचारी नेताओं ने कहा कि यह आदेश अधिकारियों के लिए है कि वे सुबह 9 से 11 बजे तक आम लोगों की शिकायतें सुने लेकिन इसमें तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को भी बेगार कराने के लिए लपेट दिया गया है। उन्होंने कहा यह आदेश किसी भी तरह सही नहीं कहा जा सकता। कर्मचारी नेताओं ने कहा कि दोहरी उपस्थिति की प्रक्रिया भी कर्मचारियों के लिए असुविधाजनक और अपमानजनक है। जबकि जिला स्तरीय अधिकारियों को मशीनी उपस्थिति देने से मुक्त रखा गया है। कर्मचारी नेताओं ने कहा कि इस तरह के तुगलकी फरमानों से कर्मचारियों के लिए दमनकारी मंशा का इजहार किया जा रहा है जो उन्हें मान्य नहीं है। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के प्रादेशिक नेतृत्व ने 6 जुलाई को सुबह 10 बजे से इन आदेशों पर विरोध जताने के लिए सभी जिलों में कलक्ट्रेट में दिनभर धरना प्रदर्शन के कार्यक्रम की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि जालौन जिले में भी इसके लिए जोरदार तैयारियां की गई हैं। जिसमें ब्लाॅक स्तर तक के साथियों की भागीदारी की अपेक्षा की गई है। बैठक में जयनारायण सेन, नागेन्द्र त्रिपाठी, नरेश चन्द्र द्विवेदी, पुष्पेन्द्र नाथ त्रिपाठी, अंगद सिंह कछवाहा, नीरज, अखलेश शर्मा, मनोज कुमार, महेन्द्र कुमार आदि मुख्य रूप से उपस्थित रहे।






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