कोंच-उरई। एमएलसी प्रतिनिधि आरपी निरंजन ने कहा है कि मंच पर करतब दिखाना ही कला नहीं है बल्कि सही कला वही है जो समाज और राजनीति में व्याप्त कुरीतियों को लेकर अपने अभिनय के दम पर समाज के लोगों को झिंझोडने का काम कर सके और इस काम को श्दर्पण्य के नौसिखिया लेकिन कला में पूरी तरह से पारंगत रंगकर्मियों ने अपनी जोरदार प्रस्तुतियों के माध्यम से कर दिखाने का स्तुत्य प्रयास किया है। वे यहां बीती रात शिवनारायण धाम में संयोजित दर्पण जन कल्याण समिति के कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। दर्पण जन कल्याण समिति के तत्वाधान में गर्मी की छुट्टियों के वक्त को उपयोगी बनाने के लिये कमला नेहरू बालिका इंटर कॉलेज में एक माह का नाट्य प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया था जिसमें ढाई सैकड़ा से भी अधिक बाल एवं युवा रंगकर्मियों ने सिद्धहस्त प्रशिक्षकों द्वारा अभिनय कला की बारीकियों को सीखा और इस एक महीने में उन्होंने जो भी सीखा उसकी रंगारंग प्रस्तुतियां बीती रात शिविर के समापन अवसर पर देते हुये यह सिद्ध कर दिया कि उन्होंने बाकई समाज में व्याप्त बुराइयों को लेकर बहुत ही प्रभावोत्पादक नाटक तैयार किये हैं जिन्हें वे आने बाले समय में नुक्कड़ नाटकों की शक्ल में जनता के बीच ले जाने बाले हैं। समापन वेला में मंचस्थ अतिथियों एमएलसी प्रतिनिधि आरपी निरंजन, पालिका चेयरपर्सन प्रतिनिधि विज्ञान विशारद सीरौठिया, शिक्षा के क्षेत्र में लब्धप्रतिष्ठ नाम कृपाशंकर द्विवेदी बच्चू महाराज, टीवी/फिल्म कलाकार देवदत्त बुधौलिया, पूर्व ब्लॉक प्रमुख माधौगढ सुदामा दीक्षित, जिपं सदस्य नम्रता तिवारी दीक्षित, सीओ नवीनकुमार नायक, पूर्व विधायक संतराम सिंह सेंगर, शीलू गौतम, ज्ञानस्वरूप राजपूत, महेन्द्र भीष्म, गीतिका वेदिका, राजेश्वर पाराशर आदि ने मोमबत्तियां जला कर कार्यक्रम की शुरुआत की। कार्यक्रम का शुभारंभ अमित चैरसिया के बांसुरी वादन से हुआ। अध्यक्षता चैधरी ब्रजेन्द्र मयंक ने की एवं कार्यक्रम का संचालन संस्था प्रमुख डॉ. मृदुल दांतरे ने किया। अतिथियों ने दिवंगत बाल रंगकर्मी स्व. मिताली दुवे को श्रद्धांजलि दी। अतिथियों ने दर्पण के इस निःस्वार्थ प्रयास की मुक्त कंठ से सराहना करते हुये कहा कि कोंच एक सांस्कृतिक नगर है और यहां की सामाजिक संस्थायें इस लिये साधुवाद की पात्र हैं क्योंकि वे अपनी इस अमूल्य थाती को आगे ले जाने में पूरी तन्मयता से जुटी हैं। प्रशिक्षु बाल एवं युवा रंगकर्मियों ने शहीद सैनिक के साथ बकरी व भूख जैसे एकांकियों के माध्यम से समाज और राजनीति में व्याप्त विद्रूपताओं पर करारे व्यंग्य किये। कव्वाली, गीत और प्रहसन भी कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण रहे। इस मौके पर ब्राह्मण महासभा महामंत्री अनुरुद्ध मिश्रा, मुन्नालाल गर्ग, उपन्यासकार सुरेन्द्र नायक, नरोत्तम स्वर्णकार, संतोष तिवारी, प्रेम नदीम, गजराज सिंह सेंगर, कन्हैया नीखर, जितेन्द्र राय, भाजपा अध्यक्ष प्रदीप गुप्ता, नरेश वर्मा, वीरेन्द्र त्रिपाठी, संजय सिंघाल, सतीश राठौर, अभिषेक रिछारिया, अतुल शर्मा, आशुतोष हूंका, अखिलेश दुवे सहित सैकड़ों की संख्या में पुरुष, महिलायें और बच्चे मौजूद रहे। कार्यक्रम की सफलता में संस्था प्रमुख डॉ. मृदुल दांतरे के अलावा सूर्यदीप सोनी, दीपू सोनी, शिवानी श्रीवास्तव, मोहित कौशल, ऋषि झा, शिवम झा, अन्नू मलिक, नेहा राठौर, शबनम झा, राघवेन्द्र चिंगारी, अमन सक्सेना आदि ने कठोर परिश्रम कर इसे सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। संस्था की पत्रिका गुलिस्तां का विमोचन भी किया गया।

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