उरई। भारतीय जन नाट्य संघ इप्टा द्वारा 1 जून से 25 जून तक बाल रंगमंचीय कार्यशाला का समापन कल शाम रमालय उत्सव गृह में किया गया प्रशिक्षण में बच्चों द्वारा तैयार चिड़िया और मां की नाटय प्रस्तुति जन आंदोलन के प्रणेता टीडी वैद्य प्रेक्षागृह, रंगकर्मी सुदर्शन बाथम मंच पर की गई। बाल रंगकर्मी किट्टू और बिट्टू की मां श्वेता की स्मृति में कार्यक्रम को समर्पित किया गया
नाट्य प्रस्तुति चिड़िया और मां राज पप्पन द्वारा लिखित एवं निर्देशित नाटक में चिड़ियों और पेड़ों की सुरक्षा पर्यावरण को कैसे बचाएं धरती मां आज 70 वर्षों के बाद भी कमजोर है। बलात्कार, भ्रूण हत्या, दहेज हत्याएं, भ्रष्ट व्यवस्था जैसी सामाजिक कुरीतियों के कारण वातावरण प्रदूषित बनाया जा रहा है। देश की आजादी में सक्रियता के साथ जान की बाजी लागने वाले महापुरुषों कनकलता, झलकारी बाई, डॉक्टर अंबेडकर, रानी लक्ष्मीबाई, भगत सिंह, कैप्टन लक्ष्मी सहगल, महात्मा गांधी, अशफाकुल्लाह खां को याद किया गया। बाल प्रशिक्षण में रंगकर्मी शिवी यादव, खुशी यादव, शिवानी, दीपांशी, भूमि वर्मा, दीपक, अमन, यश, श्रद्धा तिवारी, बिट्टू, अनुकृति ने भाग लिया।
सम्मान पत्र के साथ मुंशी प्रेमचंद का साहित्य बच्चों को दिया गया। कार्यक्रम में डॉक्टर रामाधीन, डॉक्टर सतीशचंद्र शर्मा, धर्मेंद्र कुमार, मुन्नालाल नामदेव, दीपेंद्र, संजीव, धनीराम, प्रीति, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य डॉक्टर स्वाति राज, रमा शर्मा, अवधेश शर्मा, मिस्टर सिंह, राजकुमार सिंह, प्रदीप, राकेश दोहरे, डॉक्टर अंकुर, नीरज कुमार वर्मा, देवेंद्र शुक्ला, अमजद आलम, संतोष दीक्षित आदि मौजूद रहे। बाल रंगकर्मी दीपांशी ने सैनिक जो आतंकवादियों के बीच हंसकर लड़ते-लड़ते शहीद हो जाते हैं। कैफी आजमी के गीत कर चले हम फिदा जानो तन साथियों अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों पर बेहतरीन अभिनय किया।






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