उरई। पुलिस की जर्जर व्यवस्था का ऐसा नमूना सामने आया है जिससे लोगों को सुरक्षा और न्याय दिलाने के लिए बनी इस एजेंसी को पाखंड मानने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। उरई कोतवाली क्षेत्र के मड़ोरा गांव निवासी संतोष कुमार ने बताया कि गत वर्ष उनके दामाद हमीरपुर निवासी संजय विश्वकर्मा ने अपनी लाइसेंसी रायफल से उनके घर में उनकी दूसरी पुत्री मंजू पत्नी कुलदीप उर्फ पूरन को हत्या के इरादे से गोली मार दी थी। 23 जून 2016 को हुई इस वारदात का मुकदमा उरई कोतवाली में बाकायदा दर्ज है लेकिन आज तक उक्त संजय विश्वकर्मा के खिलाफ कोई कार्रवाई नही हुई। यहां तक कि उसके लायसेंस निरस्तीकरण की भी रिपोर्ट नही भेजी गई है। उन्होनंे बताया कि इस बीच संजय विश्वकर्मा ने उरई आकर अपनी पत्नी यानी उसकी पुत्री विनीता पर उक्त मामले में घरवालों पर समझौते का दबाव बनाने के लिए जोर डाला जिसके क्रम में उसकी मारपीट की। इस दौरान उसने विनीता की गला दबाकर हत्या का भी प्रयास किया। यह मुकदमा भी आईपीसी की धारा 307 में उरई कोतवाली में दर्ज हो चुका है। बावजूद इसके कोतवाली पुलिस न जाने क्यों संजय विश्वकर्मा को अभयदान दिये हुए है। उन्होंने बताया कि उसके दुस्साहस की वजह से उनका पूरा घर भय के माहौल में जीने को मजबूर है। मंजू तो गोली लगने की घटना के बाद विक्षिप्त तक हो चुकी है। फिर भी यह घटना पुलिस को गंभीर नही लग रही और उसने उदासीनता ओढ़ रखी है। पुलिस अधीक्षक भी संतोष की इस फरियाद पर चैंके बिना नही रहे। उन्होंने सीओ सिटी अरुण कुमार सिंह को इस मामले में तत्परता पूर्वक जांच के लिए निर्देशित कर दिया है।






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