उरई। बेसिक शिक्षा विभाग बेशर्मी में सबको पीछे छोड़ रहा है। सोमवार को जिलाधिकारी ने विभाग के रवैये की वजह से बीएसए कमलेश ओझा को जमकर खरी-खरी सुनाई थी और जिले के सभी नौ विकास खंडों के खंड शिक्षाधिकारियों की चरित्र पंजिका में प्रतिकूल प्रविष्टि अंकित करा दी थी। उम्मीद की गई थी कि इससे महकमा खौफ खाकर अपनी चाल सुधारेगा। लेकिन कुत्ते की पूंछ की तरह लगता है कि यह विभाग भी कितनी लानत-मलामत होने के बावजूद सीधा होने वाला नही है। इसकी मिसाल महेबा विकास खंड के गहपुरा स्थित प्राथमिक विद्यालय को देखने पर सामने आई। जालौन टाइम्स की टीम जब उक्त विद्यालय में पहुंची तो बच्चे तो ड्रेस पहने मास्टर साहब का इंतजार करते मिले लेकिन मालूम हुआ कि प्रधानाध्यापक अखिलेश न तो आये हैं और न ही किसी को यह पता है कि वे कब आयेगें। ग्रामीणों ने बताया कि प्रधानाध्यापक स्कूल में आते ही नही हैं क्योंकि उनकी खंड शिक्षाधिकारी से सैटिंग है। गौरतलब है कि जिले के ज्यादातर खंड शिक्षाधिकारी मास्टरों से महीना बांधे हुए हैं। जिसके एवज में उन्हें जब सुविधा हो तभी विद्यालय पहुंचने की छूट है। अन्यथा वे गोल रहते हैं। दूसरी ओर रजिस्टर में उनकी हाजिरी पूरी कर दी जाती है जिससे उन्हें वेतन में कोई घाटा नही हो पाता। इसी कारण गहपुरा के ही हेडमास्टर साहब ही नही जिले के कई विद्यालयों में अध्यापकों के दर्शन करना मुश्किल है। शायद यह बताने की जरूरत नही है कि प्रधानाध्यापक नही आ रहे तो विद्यालय में मिडडे मील भी नही बन रहा। जाहिर है कि इसमें भी सरकार को चूना लगाने की कारिस्तानी जरूर होगी। मिडडे मील बने या न बने लेकिन उसका खर्चा और गल्ला तो हेडमास्टर साहब को तो मिलना ही है। इसे ही कहते है कि आम के आम और गुठलियों के दाम।

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