कोंच-उरई । आज सबेरे कोतवाली के सिपाहियों ने जांबाजी का परिचय देते हुये भैंसों से लदा एक ट्रक पकड़ा है जिसमें अट्ठारह भैंसें लदी थीं। इसी के साथ पुलिस ने चार लोगों को भी हिरासत में लेकर पशु क्रूरता अधिनियम के तहत कार्यवाही की है, जबकि ट्रक को सीज कर दिया गया है। कोंच से नियमित रूप से पशुओं की तस्करी को बड़े पैमाने पर अंजाम दिया जाता है, आरोप है कि सारा खेल पुलिस की नाक के नीचे और उसकी मिली भगत से होता है जिसके चलते पशु तस्करों के हौसले बुलंद हैं। पुख्ता सूत्रों की अगर मानें तो उक्त ट्रक में लगभग डेढ दर्जन बछड़े भी लदे थे लेकिन पुलिस ने उन्हें लिखापढी में दिखाने से परहेज किया है।

कोंच में पशु तस्करी कोई नई बात नहीं है, जब से अबैध बूचड़खानों पर सरकार ने नकेल डाली है तभी से कोंच में पशु कटान के चोरी छिपे होने बाले मामलों को छोड़ भी दें तो यहां से प्रतिदिन कम-अज-कम तीन से चार ट्रक पशु बाहर के स्लॉटर हाउसों में भेजे जाते हैं। इस काम में पुलिस से पशु तस्कारों की मिली भगत भी जग जाहिर है, खासतौर पर यूपी 100 की गाडिय़ों का उनसे बंधा है जिसके चलते वे बिना किसी रोक टोक के इस खेल को अंजाम देने में लगे हैं। लेकिन आज सबेरे पशु तस्करों को उस वक्त भारी पड़ गया जब पशुओं से भरा ट्रक सभी पुलिस प्वाइंट्स पार करता हुआ ब्रफिक्री से जालौन रोड की ओर बढा और वहां पिकेट ड्यूटी कर रहे दो जांबाज सिपाहियों ने उसे पकड़ लिया। सिपाहियों इंद्रेश व चंद्रभान सिंह ने उस ट्रक नं. यूपी 92 टी 1875 को रोक कर जब उसमें झांका तो यह देख कर वे दंग रह गये कि उसमें भैंसों का जखीरा लदा था। इस दौरान मवेशियों की खेप ले जा रहे लोगों ने उन सिपाहियों को धन का लालच देने की कोशिश की लेकिन उन्होंने उनकी एक न सुनी। सिपाहियों ने सभी चारों अभियुक्तों को पंचानन चौराहे पर बनी पुलिस चैक पोस्ट की कोठरी में बंद कर दिया और पशुओं की बरामदगी कर ली तथा उन्हें समीप स्थित सूरज ज्ञान महाविद्यालय कैम्पस में अनलोड करा दिया। इसके बाद उन्होंने किये गये गुडवर्क की सूचना कोतवाल को दी। भैंसों को स्थानीय लोगों की सुपुर्दगी में दिया गया है, जबकि ट्रक को सीज कर दिया गया है। चारों आरोपियों के खिलाफ पशु क्रूरता अधिनियम की धारा 11 (घ) में एफआईआर दर्ज कर ली गई है। आरोपियों के नाम ट्रक चालक चंद्रभान धोबी पुत्र प्रेमचंद्र निवासी कालपी, इरफान पुत्र मुन्ना, नाजिर पुत्र चैनू निवासीगण आराजी लेन कोंच तथा तारिक हुसैन पुत्र अजीम निवासी रोशनपुर औरैया बताये गये हैं। हैरान करने बाली बात यह है कि आराजी लेन जहां से पशुओं को ट्रकों में लोड किया जाता है, से पंचानन चौराहे तक पहुंचने में अव्वल तो इलाकाई खेड़ा चौकी के दरबाजे के सामने से ही निकलना पड़ता है और दूसरे पंचानन पर भी पुलिस पिकेट के अलावा यूपी 100 की नजरें रहती हैं। इतने सारे प्वाइंट्स को पशु तस्कर कैसे आसानी से पार कर लेते हैं?

ट्रक में बछड़े भी लदे होने का विहिप का दावा
आज भैंसों से भरा जो ट्रक पुलिस द्वारा पकड़ा गया है उसमें न केवल डेढ दर्जन भैंसें बल्कि इतने ही बछड़े भी लादे गये थे जिन्हें भैंसों की आड़ में छिपाया गया था। विश्व हिंदू परिषद् के नगर अध्यक्ष सुशील दूरवार मिरकू महाराज, गौ रक्षक दल के आशुतोष रावत तथा बजरंग दल के नगर संयोजक आकाश बुधौलिया भी पशुओं की पुलिस द्वारा बरामदगी की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंच गये थे। मिरकू ने दावा किया है कि ट्रक में सिर्फ भैंसें ही नहीं थीं, उसमें लगभग डेढ दर्जन बछड़े भी लदे थे जिन्हें भैंसों के पीछे छिपा कर ले जाया जा रहा था। उनका कहना है कि उन लोगों ने ही बछड़ों को मुक्त करा कर नदीगांव रोड की तरफ हांक दिया था। गौरतलब यह है कि पुलिस एफआईआर में बछड़ों का कहीं भी जिक्र नहीं आया है।

पशु तस्करों को पकडऩा शौक है चंद्रभान का
आज सुबह जिस दिलेरी का परिचय देते हुये पशुओं की तस्करी रोकते हुये अट्ठारह भैंसें और चार अभियुक्त कोतवाली पुलिस द्वारा पकड़े गये उसमें सिपाही का जज्बा सलाम करने योग्य है। सिपाही चंद्रभानसिंह ने पशु तस्करों के खिलाफ अभियान चलाना अपना शौक बना लिया है। आज के अभियान में पशु तस्करों ने उक्त सिपाही को तीस हजार का खुला ऑफर ट्रक पास हो जाने के लिये पशु तस्करों की ओर से दिया गया था लेकिन उसने इस बड़ी रकम को ठुकरा दिया और अपनी ड्यूटी को पूरी ईमानदारी से अंजाम तक पहुंचाया। बताया गया है कि इससे पहले उसने कुठौंद थाने में तैनाती के दौरान भी तकरीबन दो सैकड़ा मवेशियों को इसी तरह पकड़ा था, हदरुख में भी उसने डेढ सैकड़ा पशु पकड़े थे। वह ऐसे कमोवेश ग्यारह मुकदमों का खुद वादी है।

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