उरई। समाजवादी पार्टी के शासन के समय से शनिवार को थाना स्तर पर आयोजित की जाने वाली समाधान दिवस की परंपरा को सरकार बदलने के बाद में भी बरकरार रखा गया है। इस आयोजना को सार्थक रूप देने के लिए मंडल और जोन स्तर पर बैठे उच्चाधिकारियों को भी इनमें दौड़ाया जा रहा है। इसके तहत कानपुर जोन के एडीजी अविनाश चंद्रा ने आज आटा थाने में समाधान दिवस की आयोजना का औचक अवलोकन किया। शांति व्यवस्था और अपराध के तीन प्रमुख कारक गिनाये जाते हैं। जिनमें जर, जोरू और जमीन शामिल है। इसलिए जमीन संबंधी विवादों के समाधान के लिए थाना दिवस की रूपरेखा सपा शासन में तय की गई थी। लेकिन जब इन आयोजनों में पहुंचने वाले वास्तविक रूप से पीड़ित फरियादियों को कोई सार्थक राहत न मिली तो थाना दिवस पुलिस और लेखपालों के एक दिन की बरबादी का दिवस बनकर रह गया। साथ ही फरियादियों ने थाना दिवस में आना छोड़ दिया। यह स्थिति कमोवेश अभी भी बरकरार है। फरियादियों के न होने की वजह से इन लोगों के पास थाने में बैठकर मक्खियां मारने के अलावा कोई काम नही बचा। इस बीच आज आटा में थाना दिवस में आये फरियादियों की सुनवाई जब जिलाधिकारी नरेंद्र शंकर पांडेय और एसपी अमरेंद्र प्रसाद सिंह संयुक्त रूप से कर रहे थे उसी समय कानपुर जोन के एडीजी अविनाश चंद्रा पहुंच गये तो हलचल में नये आयाम जुड़ गये। बाद में कालपी के उप जिलाधिकारी सतीश चंद्र ने बताया कि 11 फरियादियों ने इसमें प्रार्थना पत्र दिये हैं। जिनके निस्तारण के लिए राजस्व तथा पुलिस विभाग की टीमों को मौके पर भेजा गया है।

Leave a comment