
उरई । जनपद के सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को एक साथ प्रतिकूल प्रविष्टि देने के जिलाधिकारी के कठोर कदम के बाद भी बेसिक शिक्षा के अधिकारियों की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ा है । नए शिक्षा सत्र को शुरू हुए एक पखवारा बीत चुका है लेकिन स्कूलों में पठन –पाठन की सुचारु व्यवस्था तो दूर कई स्कूलों में मास्टर जी ने अभी तक दर्शन देना भी गवारा नहीं किया है । इससे खंड शिक्षा अधिकारियों की पॉल भी खुल कर सामने आ गई है जिन पर स्कूलों का औचक निरीक्षण कर व्यवस्था को चुस्त दुरुस्त बनाये रखने का दायित्व भी है ।
इसी क्रम में महेबा ब्लाक के मघापुर प्राथमिक विद्यालय का मामला सामने आया है जहाँ तैनात प्रधानाध्यापक अजय प्रताप सिंह ने अभी तक ड्यूटी पर आना गवारा नहीं किया है । उनकी सहयोगी अध्यापिका सुनीता कुमारी भी अगर उनके नक्शे कदम पर विद्यालय आना छोड़ देतीं तो विद्यालय का ताला तक न खुले । लेकिन प्रधानाध्यापक के न आने से स्कूल के नाम पर केवल औपचारिकता पूरी की जा रही है । अभी तक एक भी दिन विद्यालय में मिड डे मील नहीं बना है । 70 के लगभग बच्चे इस विद्यालय में नामांकित हैं लेकिन 5-6 बच्चे ही आते हैं । वे भी थोड़ी उछल कूद कर आने के थोड़ी ही देर बाद घर वापस चले जाते हैं ।
ग्रामीणों ने बताया कि प्रधानाध्यापक की उदासीनता से स्कूल चलो अभियान जैसी सुगबुगाहट न होने से कई घरों में पढ़ने की उम्र लायक बच्चों का एडमीशन उनके अभिभावकों ने जागरूकता के अभाव में स्कूल में नहीं कराया है । सरकारी स्कूल की बेहाल दशा के कारण लोग गाँव के आसपास खुले प्राइवेट स्कूलों में अपनी हैसियत से ज्यादा फीस चुका कर बच्चों को भेज रहे हैं जो निशुल्क बुनियादी शिक्षा के सरकारी संकल्प का उपहास है । खंड शिक्षाधिकारी महेश शर्मा से जब प्रधानाध्यापक के न आने के बारे में पूँछने के लिए फोन किया गया तो उन्होने काल रिसीव नहीं की ।






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