उरई। जिले में आस्था के केन्द्रों तक का कोई पुरसाहाल नहीं है। एट क्षेत्र में दिल्लीपत और महोबा की एतिहासिक युद्ध की सबसे बड़ी रणभूमि रहे बैरागढ़ धाम की दुर्दशा इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है।
आल्हा ऊदल की लड़ाई में बैरागढ़ की रणभूमि सबसे ज्यादा प्रसिद्ध है जहां भीषण सहार के बाद गुरू गोरखनाथ के कहने से आल्हा अपनी कुलदेवी मां शारदा के मन्दिर में साग गाड कर हमेशा के लिये जगलों मे चला गया था । इस किवदन्ती की वजह से सारे देश से पर्यटक और श्रद्धालु नवरात्र के समय बैरागढ़ की शारदा शक्तिपीठ पर दर्शनों के लिये उमड़ते है फिर भी यह स्थल जिम्मेदारों की उपेक्षा का शिकार है।
सोमवार को बिरगुवां बुजुर्ग के प्रधान विजय सिंह और नरेन्द्र मोदी विचार मंच के प्रांत अध्यक्ष डा0 विनोद पाठक और जिला अध्यक्ष नीलेश दीक्षित अपने साथियों के साथ जिला प्रशासन को ज्ञापन देने आये।
उन्होने ज्ञापन देते हुये सिटी मजिस्ट्रेट को बताया कि शारदापीठ तक अंडा से बिरगुंवा बुजुर्ग बाइपास होकर बैरागढ़ धाम तक का सात किलोमीटर का रास्ता अत्यत दुरूह है।
पूरा रास्ता क्षतिग्रस्त होने से श्रद्धालुओं को चोटिल होना पड़ता है फिर भी दुरूस्त रास्ता बनवाने पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। उन्होनें सिटी मजिस्ट्रेट से कहा कि इस रास्ते पर सी0सी0 रोड़ बनवा कर लोगों की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करे।
सिटी मजिस्ट्रेट ने ज्ञापन स्वीकार करते हुये इस दिशा मे सकारात्मक प्रयास का आश्वासन दिया ।

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